फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Now the court has acquitted terrorist Abdul Karim Tunda

अब आतंकी टुंडा भी अदालत से हुआ बरी

Wed, 11 Mar 2015 09:04 AM IST
Updated Wed, 11 Mar 2015 09:04 AM IST
विज्ञापन
Now the court has acquitted terrorist Abdul Karim Tunda

राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने लश्कर-ए-ताइबा के आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को आतंकवाद से जुड़े एक मामले में आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां निरोधक अधिनियम (टाडा) व अन्य आरोपों से बरी कर दिया।

विज्ञापन


अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई भी साक्ष्य पेश नहीं कर पाया, जिससे साबित हो कि टुंडा वर्ष 1994 में दर्ज इस मामले में लिप्त था। टुंडा उन 20 आतंकियों में शामिल है, जिसे मुंबई आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से सौंपने की मांग की थी।
विज्ञापन


टुंडा के खिलाफ 40 आतंकी घटनाओं में शामिल होने के मामले अभी विचाराधीन हैं। पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीना बंसल कृष्णा ने 73 वर्षीय टुंडा को टाडा के अलावा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम, भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप से बरी कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


उसके खिलाफ अभी कई मामले लंबित है। ऐसे में उसे जेल में ही रहना होगा। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 17 जनवरी 1994 को पांच आतंकियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 150 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ व छह खंजर बरामद किए थे।

लश्कर ए ताइबा के बम विशेषज्ञ पर कुल 40 मामले

Now the court has acquitted terrorist Abdul Karim Tunda

पुलिस ने इन पांचों के अलावा इस मामले में टुंडा के खिलाफ भी आरोप दायर किया था। अदालत ने दिसंबर 1999 को आरोपी अब्दुल हक, आफताब, अब्दुल वाहिद, अफाक व अफरान को दोषी ठहराते हुए धारा 120बी व विस्फोटक पदार्थ अधिनियम में सजा सुनाई थी।

टुंडा की गिरफ्तारी न होने पर उसे अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया था। टुंडा को पुलिस ने 16 अगस्त 2013 को भारत-नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया था।

अभियोग तय करने के दौरान उसके अधिवक्ता एमएस खान ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं है बल्कि उसे इकबालिया बयानों के आधार पर गिरफ्तार किया है और कानून की दृष्टि में ऐसे बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा उसके कब्जे से कोई भी विस्फोटक पदार्थ या हथियार बरामद नहीं हुआ। वहीं सरकारी अधिवक्ता राजीव मोहन ने तर्क रखा कि अदालत ने अन्य आरोपियों को दोषी ठहराकर सजा प्रदान की है और उनके बयानों से स्पष्ट है कि आतंकी घटनाओं में टुंडा लिप्त था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed