मोदी के नक्शेकदम पर चल रहा संघ
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नक्शेकदम पर चलते हुए संघ का प्रयास बडे-बडे आयोजनों के जरिए देश के भगवामय माहौल को भुनाने का है। संघ का यह प्रयास जनमानस में अपना आधार बढ़ाकर संगठन को व्यापक बनाने के लिए है।
शुक्रवार को अहमदाबाद में शुरू हुए तीन दिवसीय आयोजन के अलावा संघ की ओर से महाराष्ट्र के औरंगाबाद और उत्तर प्रदेश के कानपुर में आयोजन की तैयारी पूरी हो गई हैं। अहमदाबाद की तर्ज पर ही 15 से 17 फरवरी तक कानपुर में संघ का बड़ा आयोजन तय है। इसके लिए संघ ने अपने सभी कार्यकर्ताओं को सूचना भेजनी शुरू कर दी है। इससे पहले आगरा और हरिद्वार में संघ के बड़े कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं।
हालांकि संघ अपने इस आयोजनों को पूरी तरह से आधार बढ़ाने का प्रयास बता रहा है, लेकिन अपना आधार बनाकर वह केंद्र की सियासत पर अपना दबदबा बरकरार रखना चाहता है। इसलिए संघ ने मोदी के गढ़ माने-जाने वाले गुजरात के अहमदाबाद में भी बड़ा आयोजन रखा है।
बड़े-बड़े आयोजनों के जरिए माहौल भुनाने का प्रयास
बताया जा रहा है कि गुजरात में संघ का इतना बड़ा आयोजन 15 वर्षों के बाद हो रहा है। इससे पहले साल 2000 में संघ का इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ था। 2001 में राज्य की कमान मोदी के हाथों में आने के बाद से राज्य में संघ के संगठनों की मनमानी पर रोक लग गई थी।
अब अपने आधार को बढ़ाने के प्रयासों में संघ ने मोदी के ही पैंतरे को आजमाया है। मोदी के नक्शेकदम पर चलते हुए संघ का प्रयास बडे़-बडे़ आयोजनों के जरिए देश के माहौल को अपने पक्ष में करने का है।
संघ का मानना है कि लोकसभा चुनाव से बदली सियासी फिजा के बाद देश में चारों ओर राष्ट्रवाद का बोलबाला है। खासतौर से युवाओं में संघ और उसके संगठन के प्रति आकर्षण बढ़ा है। इस आकर्षण को भुनाने में बडे़ कार्यक्रम बेहद कारगर साबित होंगे।
संघ के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार ऐसे बडे़ कार्यक्रमों के आयोजनों का दोहरा लाभ होता है। एक तो संगठन के कार्यकर्ताओं में उत्साह भर जाता है, दूसरा आम जनता में भी आकर्षण बढ़ता है। उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने देशभर में बड़े-बड़े आयोजनों के जरिए कांग्रेस के खिलाफ माहौल को अपने पक्ष में भुनाया था।