अब राजनीति से संन्यास को लेकर कांग्रेस में घमासान
कांग्रेस में युवाओं और बुजुर्गों की सियासी प्रासंगिकता पर छिड़ी बहस और तेज हो गई है। बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने राजनीति से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया।
उन्होंने कहा कि वे आलाकमान को बताना चाहते हैं कि वह 15 जनवरी, 2015 को 65 साल के हो जाएंगे और उसके बाद राजनीति को छोड़ देंगे।
चतुर्वेदी ने कहा कि वह 65 साल की उम्र में रिटायर होना तय कर चुके हैं। उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि वे सिर्फ राज्यसभा का कार्यकाल पूरा करेंगे और सक्रिय राजनीति से दूर रहेंगे।
उन्होंने एक तय उम्र सीमा के बाद सक्रिय राजनीति से रिटायरमेंट की बात की खुलकर पैरवी की और दूसरे लोगों को इस पर अमल करने के लिए भी कहा। मगर दूसरी तरफ पार्टी ने चतुर्वेदी के बयान पर सीधे कुछ कहने से परहेज किया है।
कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद ने कहा है कि 2015 आने दो। तब देखा जाएगा। सबके अपने विचार और भावना होती है। ये समय ऐसी बातें बोलने का नहीं बल्कि संघर्ष करने का है। सलमान खुर्शीद कांग्रेस के मंच से बोल रहे थे।
खुर्शीद बोले, 2015 आने दो
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी और दिग्विजय सिंह एक तय उम्र सीमा के बाद राजनीति से संन्यास लेने की पैरवी कर चुके हैं।
मगर इन दोनों नेताओं ने अभी तक खुद के राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान नहीं किया है। लेकिन सत्यव्रत ने इन दोनों से दो कदम आगे जाते हुए खुद के राजनीति से संन्यास लेने का खुलकर ऐलान कर दिया।
चतुर्वेदी के इस ऐलान के बाद लाजिमी है कि एक तय उम्र सीमा में सक्रिय पदों से दूर करने की बात करने वाले नेताओं पर ऐलान करने का दबाव बढ़ेगा और साथ ही पार्टी के अंदर इस बात को लेकर घमासान बढ़ने के भी आसार हैं।
द्विवेदी और दिग्विजय सिंह की बात का 60 साल से कम के पार्टी के नेता पहले ही खुलकर विरोध कर चुके हैं। आनंद शर्मा और मनीष तिवारी ने इसका विरोध किया है।
वहीं बुजुर्गों के खिलाफ झंडा बुलंद कर रहे राहुल समर्थक पार्टी के राष्ट्रीय सचिव भी कह चुके हैं कि राजनीति में उम्र सीमा तय करने वाले नेताओं को सबसे पहले खुद संन्यास का ऐलान कर उदाहरण पेश करना चाहिए।