पीएम मोदी के 'सुपर पीएमओ' से नाराज हुए राजनाथ सिंह
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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के कई मंत्री ‘सुपर पीएमओ’ की भूमिका को लेकर नाराज हैं। यह नाराजगी नई सरकार के गठन के करीब तीन सप्ताह बाद भी मंत्रियों को अपनी पसंद के निजी सचिव रखने की अनुमति नहीं मिलने को लेकर है।
माना जा रहा है कि राजनाथ सिंह ने अपनी नाराजगी से पीएम को अवगत करा दिया है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि सिंह ने मसले के समाधान के लिए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने को कहा है। सूत्रों ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को राजनाथ जैसे बड़े कद के नेता के लिए शर्मिंदगी माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय जिस तरह से ‘सुपर पीएमओ’ की तरह काम कर रहा है उसको लेकर गलत संदेश जा रहा है। दरअसल, सच्चाई यह है कि राजनाथ सिंह अंतिम समय तक सरकार में शामिल होने के अनिच्छुक थे। वह सरकार में नंबर-2 बनने के बजाय पार्टी में नंबर-1 बना रहना चाहते थे। माना जाता है कि मोदी ने व्यक्तिगत रूप से राजनाथ पर सरकार में शामिल होने का दबाव डाला था।
राजनाथ सिंह के पसंदीदा पीएस का नाम हुआ था खारिज
नाराजगी का मुद्दा यह है कि राजनाथ ने 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक सिंह का नाम निजी सचिव के लिए प्रस्तावित किया था। आलोक पूर्व सरकार में विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद के साथ काम कर चुके हैं।
पीएमओ ने राजनाथ की पसंद को इस आधार पर खारिज कर दिया है कि सभी नियुक्तियों को नियुक्ति मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी लेनी पड़ेगी। पार्टी के एक बड़े नेता ने कहा कि यह राजनाथ के लिए शर्मिंदगी है, जो न केवल पार्टी अध्यक्ष हैं बल्कि एक वरिष्ठ मंत्री भी हैं।
उनको अपनी पसंद के निजी सचिव रखने की अनुमति नहीं देना एक गंभीर मामला है और इससे सरकार के एक इकाई के रूप में काम करने को लेकर सकारात्मक संकेत नहीं मिलता।
पीएम मोदी का सुपर पीएमओ चर्चा में
वैसे सच्चाई यह है कि पीएमओ ने एक नियम बनाया है कि पूर्व सरकार में अहम पदों पर रहे नौकरशाहों को मोदी सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां नहीं दी जानी चाहिए। लेकिन पीएमओ का यह नियम अपने आप में सवाल खड़ा करता है कि क्या मोदी सरकार पूर्व सरकार के साथ काम करने वाले नौकरशाहों पर भरोसा नहीं करती।
यह केवल राजनाथ सिंह का मसला नहीं है। वरिष्ठ मंत्री रविशंकर प्रसाद, थावर चंद गहलोत, निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी और वीके सिंह सहित सहयोगी दलों के कई मंत्रियों की पसंद के निजी सचिवों की नियुक्ति को पीएमओ ने रोक दिया है। गहलोत मध्य प्रदेश कैडर के 1999 बैच के आईएएस अधिकारी ई रमेश कुमार को निजी सचिव बनाना चाहते थे।
रमेश ने निजी सचिव के रूप में काम भी शुरू कर दिया था। राज्य सरकार ने उन्हें प्रतिनियुक्ति पर भेजने को मंजूरी दे दी थी। लेकिन पीएमओ से उनकी नियुक्ति का आदेश जारी नहीं हुआ है। इसी तरह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू और वीके सिंह के निजी सचिवों की नियुक्ति भी अधर में लटकी हुई है।