फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   now rajnath singh angry on super pmo

पीएम मोदी के 'सुपर पीएमओ' से नाराज हुए राजनाथ सिंह

Thu, 19 Jun 2014 09:36 AM IST
Updated Thu, 19 Jun 2014 09:36 AM IST
विज्ञापन
now rajnath singh angry on super pmo

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के कई मंत्री ‘सुपर पीएमओ’ की भूमिका को लेकर नाराज हैं। यह नाराजगी नई सरकार के गठन के करीब तीन सप्ताह बाद भी मंत्रियों को अपनी पसंद के निजी सचिव रखने की अनुमति नहीं मिलने को लेकर है।

विज्ञापन


माना जा रहा है कि राजनाथ सिंह ने अपनी नाराजगी से पीएम को अवगत करा दिया है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि सिंह ने मसले के समाधान के लिए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने को कहा है। सूत्रों ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को राजनाथ जैसे बड़े कद के नेता के लिए शर्मिंदगी माना जा रहा है।
विज्ञापन


प्रधानमंत्री कार्यालय जिस तरह से ‘सुपर पीएमओ’ की तरह काम कर रहा है उसको लेकर गलत संदेश जा रहा है। दरअसल, सच्चाई यह है कि राजनाथ सिंह अंतिम समय तक सरकार में शामिल होने के अनिच्छुक थे। वह सरकार में नंबर-2 बनने के बजाय पार्टी में नंबर-1 बना रहना चाहते थे। माना जाता है कि मोदी ने व्यक्तिगत रूप से राजनाथ पर सरकार में शामिल होने का दबाव डाला था।
विज्ञापन
विज्ञापन

राजनाथ सिंह के पसंदीदा पीएस का नाम हुआ था खारिज

now rajnath singh angry on super pmo

नाराजगी का मुद्दा यह है कि राजनाथ ने 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक सिंह का नाम निजी सचिव के लिए प्रस्तावित किया था। आलोक पूर्व सरकार में विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद के साथ काम कर चुके हैं।

पीएमओ ने राजनाथ की पसंद को इस आधार पर खारिज कर दिया है कि सभी नियुक्तियों को नियुक्ति मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी लेनी पड़ेगी। पार्टी के एक बड़े नेता ने कहा कि यह राजनाथ के लिए शर्मिंदगी है, जो न केवल पार्टी अध्यक्ष हैं बल्कि एक वरिष्ठ मंत्री भी हैं।

उनको अपनी पसंद के निजी सचिव रखने की अनुमति नहीं देना एक गंभीर मामला है और इससे सरकार के एक इकाई के रूप में काम करने को लेकर सकारात्मक संकेत नहीं मिलता।

पीएम मोदी का सुपर पीएमओ चर्चा में

now rajnath singh angry on super pmo

वैसे सच्चाई यह है कि पीएमओ ने एक नियम बनाया है कि पूर्व सरकार में अहम पदों पर रहे नौकरशाहों को मोदी सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां नहीं दी जानी चाहिए। लेकिन पीएमओ का यह नियम अपने आप में सवाल खड़ा करता है कि क्या मोदी सरकार पूर्व सरकार के साथ काम करने वाले नौकरशाहों पर भरोसा नहीं करती।

यह केवल राजनाथ सिंह का मसला नहीं है। वरिष्ठ मंत्री रविशंकर प्रसाद, थावर चंद गहलोत, निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी और वीके सिंह सहित सहयोगी दलों के कई मंत्रियों की पसंद के निजी सचिवों की नियुक्ति को पीएमओ ने रोक दिया है। गहलोत मध्य प्रदेश कैडर के 1999 बैच के आईएएस अधिकारी ई रमेश कुमार को निजी सचिव बनाना चाहते थे।

रमेश ने निजी सचिव के रूप में काम भी शुरू कर दिया था। राज्य सरकार ने उन्हें प्रतिनियुक्ति पर भेजने को मंजूरी दे दी थी। लेकिन पीएमओ से उनकी नियुक्ति का आदेश जारी नहीं हुआ है। इसी तरह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू और वीके सिंह के निजी सचिवों की नियुक्ति भी अधर में लटकी हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed