अब सौर ऊर्जा से चलेंगे रेल कारखाने
बिजली के भारी खर्च की मार से जूझ रहे रेल मंत्रालय ने सौर ऊर्जा के जरिए इसकी काट निकाली है। यानी कि रेलवे अब अपने कारखाने सौर ऊर्जा से चलाएगा।
मंत्रालय ने सभी प्रोडक्शन यूनिटों और वर्कशाप को अपने यहां खाली पड़ी जमीनों या फिर छतों पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के निर्देश दिए हैं।
अगले पांच सालों में सभी छह प्रोडक्शन यूनिटों और 42 वर्कशाप का संचालन सौर ऊर्जा से करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे ने उच्चाधिकारियों को इस संबंध में प्रति वर्ष प्रगति रिपोर्ट भेजने को कहा है।
प्रति वर्ष खर्च होता है 8 हजार करोड़ से ज्यादा
फिलहाल बिजली और डीजल का खर्च रेलवे के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बना हुआ
है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही रेलवे को सौर ऊर्जा उत्पादन की
नसीहत दे चुके हैं।
उनकी पहल पर रेलवे ने सोलर मिशन की शुरुआत की है, जिसके
तहत कई रेलवे स्टेशनों की छतों पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाए जा चुके हैं, साथ
ही डेमू ट्रेनों की छतों पर भी इस तरह के प्लांट लगाए जाने का सिलसिला
शुरू हो गया है।
रेलवे प्रति वर्ष बिजली पर आठ हजार करोड़ या उससे अधिक की
राशि खर्च करता है। मंत्रालय की ओर से जारी आदेशों में कहा गया है कि सौर
ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए सब्सिडी दी जाएगी बल्कि इस काम में इंडियन रेलवे
आर्गेनाइजेशन फॉर अल्टरनेट फ्यूल्स (आईआरओएएफ) भी मदद करेगा।
हुई उच्चाधिकारी की नियुक्ति
मंत्रालय ने
आईआरओएएफ को ही सभी यूनिटों और वर्कशाप में इस तरह के प्लांट स्थापित करने
की जिम्मेदारी सौंपी है। इस काम की निगरानी के लिए रेलवे ने एक उच्चाधिकारी
की नियुक्ति भी की है।
रेलवे का मानना है कि यूनिटों और वर्कशापों में
अपने दम पर सौर ऊर्जा पैदा करने की काफी संभावनाएं हैं। यहां सौर ऊर्जा
पैदा कर संबंधित राज्य के मुख्य ग्रिड को भेजा जा सकता है और वहां से सीधे
बिजली मंगवाकर उनका प्रयोग किया जा सकता है।