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आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? बोस के परिजनों ने पूछा

Tue, 22 Sep 2015 01:03 PM IST
Updated Tue, 22 Sep 2015 01:03 PM IST
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now question rising on azad hind force Treasures

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सार्वजनिक की गईं फाइलों ने नेताजी की आजाद हिंद फौज (आईएनए) के खजाने के बारे में सवाल खड़े कर दिए हैं। अहम सवाल यह है कि आखिर खजाने का क्या हुआ।

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नेताजी के एक परिजन चंद्र बोस मानते हैं कि खजाने का एक हिस्सा तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पास था। उनका दावा है कि आजाद हिंद फौज के दो सदस्यों ने इस खजाने का दुरुपयोग किया था। उनमें से एक को बाद में प्रधानमंत्री सचिवालय में नौकरी मिल गई।
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बोस सवाल करते हैं कि उस समय नेहरू की अगुवाई वाली कांग्रेस को ही उस खजाने का हिस्सा मिला था। फौज में दो और लोग थे जिन्होंने खजाने का अपने हित में इस्तेमाल किया था।
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उन्होंने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है। जानकारों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय के पास रखी एक बेहद गोपनीय फाइल (संख्या-2(67)/56-71 पीएम) में भी इस बात का जिक्र है कि कांग्रेस की कार्यसमिति की देखरेख में एक ट्रस्ट का गठन किया गया था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पास था खजाने का एक हिस्सा

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आजाद हिंद फौज के कोष में से दो लाख रुपये जमा कर ट्रस्ट गठित हुआ था और उसके हस्ताक्षरकर्ताओं में नेहरू के अलावा विधानचंद्र राय भी शामिल थे।

नेताजी के जीवन पर शोध करने वाले कई लोगों ने भी जवाहरलाल नेहरू और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान दक्षिणपूर्व एशिया के सुप्रीम कमांडर रहे लार्ड माउंटबेटन के पत्रों के हवाले से इस बात की पुष्टि की है।

परिजनों का दावा है कि आजाद हिंद फौज को मिले धन का काफी हिस्सा भारत भेजा गया था। ब्याज के साथ यह रकम लगभग 114 करोड़ तक पहुंच गई होगी।

इससे पहले वर्ष 1987 में भी यह दावा किया गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को जापान, म्यामांर और सिंगापुर की सरकारों से आजाद हिंद फौज के खजाने के 48 करोड़ रुपये मिले हैं।

आईएनए की झांसी ब्रिगेड की सदस्य अरुणा चटर्जी, जो अब कोलकाता में रहती हैं, को इस बात की हल्की-सी याद है कि रंगून में एक बार नेताजी को सोने के आभूषणों से तौला गया था।

वे कहती हैं कि ऐसा कई बार अलग-अलग शहरों में हुआ था। इनमें से कुछ धन तो आजाद हिंद फौज की लड़ाई पर खर्च हुआ, लेकिन इसका कुछ हिस्सा भारत भेज दिया गया था।

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