अब बच्चों के मम्मी-पापा कहेंगे नो रैगिंग
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विश्वविद्यालय तथा अन्य संस्थानों में प्रवेश लेने वाले न केवल छात्रों बल्कि उनके अभिभावकों को भी रैगिंग की किसी गतिविधि में शामिल नहीं होने का शपथ पत्र देना होगा। यूजीसी ने अब इसे छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए जरूरी बना दिया है।
यूजीसी ने शपथपत्र को ओथ कमिश्नर द्वारा प्रमाणित कराए जाने की अनिवार्यता से छूट दी है। शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से कई अहम कदम उठाए गए हैं।
आयोग ने उच्चतर शैक्षिक संस्थानों में रैगिंग नियंत्रण के लिए विधिवत रेगुलेशन भी बना दिया है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि छात्रों के किस क्रियाकलाप को रैगिंग की श्रेणी में माना जाएगा।
रैगिंग के दोषी छात्रों के खिलाफ होगी कार्रवाई
इसी के तहत सभी संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि प्रवेश के समय ही छात्र तथा उनके अभिभावकों से अलग-अलग शपथपत्र भरवाया जाए।
इस शपथपत्र में शपथकर्ता को यह लिखकर देना होता है कि वे रैगिंग गतिविधि से दूर रहेंगे। वे जानते हैं कि रेगुलेशन के तहत कौन कौन से काम को कैंपस में रैगिंग माना जाएगा। वे रैगिंग को प्रोत्साहित करने वाली गतिविधि से भी दूर रहेंगे।
रैगिंग के आरोप में दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, यह भी छात्र को पहले ही बता दिया जाता है। अभिभावकों को भी शपथपत्र में इस नियम की जानकारी होने तथा दोषी पाए जाने पर उनके बच्चे को स्कूल से निकाले जाने का प्रावधान के बारे में जानकारी की स्वीकारोक्ति लिखकर देनी होती है।