अब बुजुर्ग कांग्रेसी भी राहुल के साथ
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हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के सिर पर होने के बावजूद कांग्रेस में युवा और बुजुर्ग नेताओं का आपसी वाकयुद्ध बदस्तूर जारी है। एकजुट होकर चुनाव की तैयारियों में जुटने की बजाय बुजुर्ग नेता अपनी कुर्सी बचाने में लगे हुए हैं।
पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी को बैकफुट पर खड़ा करने वाले बुजुर्ग नेताओं के खिलाफ युवा नेताओं के उतरने से परिस्थितियां बदलने लगी हैं। दरअसल, पार्टी के बुजुर्ग नेताओं को अब अहसास हो गया है कि कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा युवा सचिव अपने दम पर नहीं बल्कि पार्टी हाईकमान का समर्थन पाने के बाद ही उनके खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं।
इन नेताओं को इसका भी अंदाजा लग गया कि प्रियंका के समर्थन के बाद ही ये सचिव एकजुट होकर बुजुर्ग नेताओं के खिलाफ बोल रहे हैं। परिस्थितियों को बदलता देख अब बुजुर्ग नेता युवा नेताओं की मुहिम में शामिल होने की जुगत में जुट गए हैं।
युवा सचिवों के समूह में शामिल होना चाहते हैं दिग्विजय
पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा है कि वह युवा सचिवों के समूह में शामिल होना चाहते है। उन्हें भी इसमें शामिल होने का मौका देना चाहिए, ताकि पार्टी मजबूत हो। उधर, कांग्रेस के एक अन्य महासचिव मधुसूदन मिस्त्री और सीपी जोशी भी पार्टी के राष्ट्रीय सचिवों की इस मुहिम में शामिल होने की पेशकश कर चुके हैं।
बुजुर्ग नेताओं की इस पेशकश के बाद अब युवा सचिव दोबारा से अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। सचिव अगले हफ्ते दिल्ली में इस संबंध में बैठक कर सकते हैं। पार्टी उपाध्यक्ष समर्थक सचिवों की बुजुर्ग नेताओं के खिलाफ मुहिम दिग्विजय के राहुल के खिलाफ बयान देने के बाद से शुरू हुई थी।
दिग्विजय ने कहा था कि राहुल की चुप्पी के कारण ही लोकसभा चुनाव में पार्टी को हार मिली। युवा सचिवों ने खुलकर इस बयान की निंदा की थी। कई सचिवों ने कहा था कि बुजुर्ग नेताओं के पास ही कांग्रेस संगठन की पूरी जिम्मेदारी थी तो आखिर राहुल को कैसे लोकसभा चुनाव में हार के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।