{"_id":"91ed5758caeb22469247f5a33a376709","slug":"now-naxsali-uses-rti-for-raise-money-from-contractor","type":"story","status":"publish","title_hn":"रंगदारी वसूली के लिए नक्सली कर रहे आरटीआई का इस्तेमाल","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
रंगदारी वसूली के लिए नक्सली कर रहे आरटीआई का इस्तेमाल
नई दिल्ली
Updated Tue, 17 Sep 2013 03:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़े व्यावसायियों और घरानों से रंगदारी वसूल करने के लिए अब माओवादी सूचना के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया के टोरपा के जंगलों में चलने वाले शिविर पर छापेमारी में पुलिस को आरटीआई से संबंधित कागजात मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक नक्सली आरटीआई का बेजा इस्तेमाल कर रहे थे और इसके जरिए सरकारी परियोजनाओं के ठेकेदारों की लिस्ट इकट्ठा कर रहे थे जिसके जरिए उनसे रंगदारी वसूल की जा सके।
खुंती जिले में चलने वाली 30 सरकारी परियोजनाओं से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। इस जानकारी में प्रोजेक्ट के कांट्रेक्टर, प्रोजेक्ट की लागत के बारे में पूछा गया था।
सुप्रिटेंडेट ऑफ पुलिस एम तमिल वानन ने बताया कि संबंधित आरटीआई से पता चलता है कि परियोजनाओं से जुड़े़ ठेकेदारों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही थी।
पुलिस के मुताबिक माओवादियों की तरफ से ठेकेदारों से प्रॉफिट मार्जिन में से 10-30 फीसदी की हिस्सेदारी मांगी जाती है। सभी आरटीआई आवेदनों में ठेकेदारों के नाम और परियोजना की लागत की जानकारी मांगी गई थी।
विज्ञापन
रांची जोन के आईजी एमएस भाटिया ने बताया कि नक्सली आरटीआई के जरिए यह सूचना प्राप्त करने के लिए कई व्हाइट कॉलर लोगों का इस्तेमाल करते हैं। आगे भी ऐसे मामलो की जांच जारी रहेगी।
कागजात में जिन लोगों के भी नाम मिले हैं, उनके बारे में जांच पड़ताल की जाएगी।
विज्ञापन
पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया के टोरपा के जंगलों में चलने वाले शिविर पर छापेमारी में पुलिस को आरटीआई से संबंधित कागजात मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक नक्सली आरटीआई का बेजा इस्तेमाल कर रहे थे और इसके जरिए सरकारी परियोजनाओं के ठेकेदारों की लिस्ट इकट्ठा कर रहे थे जिसके जरिए उनसे रंगदारी वसूल की जा सके।
खुंती जिले में चलने वाली 30 सरकारी परियोजनाओं से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। इस जानकारी में प्रोजेक्ट के कांट्रेक्टर, प्रोजेक्ट की लागत के बारे में पूछा गया था।
विज्ञापन
सुप्रिटेंडेट ऑफ पुलिस एम तमिल वानन ने बताया कि संबंधित आरटीआई से पता चलता है कि परियोजनाओं से जुड़े़ ठेकेदारों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही थी।
पुलिस के मुताबिक माओवादियों की तरफ से ठेकेदारों से प्रॉफिट मार्जिन में से 10-30 फीसदी की हिस्सेदारी मांगी जाती है। सभी आरटीआई आवेदनों में ठेकेदारों के नाम और परियोजना की लागत की जानकारी मांगी गई थी।
विज्ञापन
रांची जोन के आईजी एमएस भाटिया ने बताया कि नक्सली आरटीआई के जरिए यह सूचना प्राप्त करने के लिए कई व्हाइट कॉलर लोगों का इस्तेमाल करते हैं। आगे भी ऐसे मामलो की जांच जारी रहेगी।
कागजात में जिन लोगों के भी नाम मिले हैं, उनके बारे में जांच पड़ताल की जाएगी।