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पढ़िए, नागराज से अब्दुल्ला बने शख्स की पूरी कहानी

Tue, 18 Aug 2015 04:06 PM IST
Updated Tue, 18 Aug 2015 04:06 PM IST
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now nagraj will remain abdullah

धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते हुए नागराज से अब्दुल्ला बने जिस युवक के अपहरण का मुकदमा उसकी मां ने दर्ज कराया था, वह अगवा नहीं हुआ और न जबरन धर्म परिवर्तन किया।

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उसने यह कदम अपनी मर्जी से उठाया और वह भविष्य में इस्लाम धर्म अपनाकर ही जीवन यापन करना चाहता है। यह बात उसने खुद थाने पहुंचकर और बाद में कोर्ट के समक्ष कहकर सभी को चौंका दिया।
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यह सुनने के बाद उसकी मां का कोर्ट के बाहर हाल बेहाल दिखीं। कई मर्तबा वह बेहोश भी हुई। इस दौरान हिंदूवादियों का हुजूम भी मां को दिलासा देता रहा।

बाद में अदालत द्वारा बालिग होने पर स्वतंत्र छोड़ दिए जाने पर वह अपनी मां के साथ घर चला गया।तुर्कमान गेट हड्डी गोदाम शिव मंदिर वाली गली में रहने वाला 22 वर्षीय युवक नागराज करीब चार साल से जकरिया मार्केट सिविल लाइंस स्थित मेडिकल स्टोर दुकान नंबर-1 पर काम करता था।
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वह करीब ढाई माह से गायब था और घर नहीं आया था। इसे लेकर उसकी मां उर्मिला चार दिन पहले उस समय हिंदूवादियों संग थाने पहुंची, जब उसे अपने बेटे के इस्लाम धर्म अपनाने संबंधी दस्तावेज मिले। उसने दुकान स्वामी सहित आधा दर्जन लोगों पर अपहरण का मुकदमा भी दर्ज कराया। तभी से पुलिस उसे तलाश रही थी।

इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी के अनुसार नागराज उर्फ अब्दुल्ला सोमवार सुबह खुद सफेद कुर्ता-पायजामा व दाढ़ी में टोपी लगाए थाने में चला आया। जब उसने अपना परिचय दिया तो उससे पूछताछ हुई।

उसने स्वीकारा कि उसने मर्जी से धर्म परिवर्तन किया है। परिजन परेशान करते थे, इसलिए घर छोड़कर चला गया था। उसका किसी ने अपहरण नहीं किया।

खूब रोई मां, पर नहीं पसीजा दिल

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जिस वक्त बेटा पुलिस के साथ अदालत में था, उस दौरान मां की थाने में सीओ तृतीय के सामने जिद थी कि एक बार उसकी बेटे से बात करा दी जाए। इस पर सीओ के निर्देश पर कोर्ट से बाहर लाकर युवक की मां से बात कराई गई। उसे मां ने रो-रोकर समझाया। मगर युवक नहीं माना और एक ही बात कही कि वह मां के साथ घर में रहेगा। मगर धर्म इस्लाम ही कुबूल है।

इसके बाद मां का हाल बेहाल रहा। इस दौरान उसने मीडिया के बस एक सवाल का जवाब दिया कि उसने यह सब मर्जी से किया है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस के अनुसार पूछताछ में युवक ने स्वीकारा कि वह पिछले करीब एक साल से इस्लाम धर्म अपनाने की तैयारी में था और घर में ही नमाज पढ़ा करता था।

मां उसका विरोध करती थी तो वह उसे नजरंदाज कर देता था। इस पर मां ने मामा से शिकायत की। मामा ने जब इस सब पर सख्ती बरतना शुरू किया तो वह घर छोड़कर चला गया। जब नागराज की मां उर्मिला से पूछा गया तो उसका जवाब था कि बेटे को घर तो ले जा रही है। मगर उसे डर है कि सास कहीं घर से न निकाल दे।

दस साल पहले पति की गंगा में डूबने से मौत के बाद पांच बेटों के परिवार को 50 गज के मकान में लेकर रह रही है। मगर सास का साफ कहना है कि उसे इस घर में नहीं रहने दिया जाएगा। इस पर हिंदूवादियों ने उसे आश्वस्त किया कि ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।

हिंदूवादी और भाजपाइयों में एक नामजद पर आक्रोश

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युवक के थाने आने की खबर पर मेयर के अलावा तमाम लोग पहुंच गए। मेयर सहित इन लोगों ने थाने में सीओ के सामने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि यह किसी दबाव में है।

उनका कहना था कि अपहरण के मुकदमे में काशिफ नाम का एक युवक नामजद है। वह काशिफ इससे पहले मडराक के मईनाथ में हुए धर्म परिवर्तन प्रकरण पर विवाद के दौरान भी चर्चाओं में आया था। इसलिए यह एक बड़ी साजिश समझ में आ रही है।

अगर की जांच कर हकीकत न निकाली गई तो सभी आंदोलन को बाध्य होंगे। इसका जवाब दिया जाएगा।

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