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संसद में सस्ते खाने पर अब सांसदों ने ही उठाए सवाल

Wed, 22 Mar 2017 09:28 PM IST
Updated Wed, 22 Mar 2017 09:28 PM IST
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now mp rising question on food of parliament canteen

संसद की कैंटीन में सब्सिडीयुक्त सस्ता खाने पर उपजे विवादों के बीच अब सांसदों की ओर से ही खाने पर दी जा रही सब्सिडी बंद करने की मांग उठने लगी है।

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बीजेडी सांसद विजयंत जय पांडा ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिख कर जन प्रतिनिधियों के प्रति लोगों का भरोसा कायम रखने और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए तत्काल सब्सिडी खत्म करने की मांग की है।
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जदयू के वरिष्ठ सांसद केसी त्यागी ने भी सब्सिडी खत्म किए जाने पर किसी भी तरह का एतराज न होने की बात कही है। कई अन्य दलों के सांसदों का भी मानना है कि बेवजह निशाना बनाए जाने से बचाने के लिए सब्सिडी को खत्म कर दिया जाना चाहिए।

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सरकार ने साधा निशाना

now mp rising question on food of parliament canteen

हालांकि सरकार ने सब्सिडी खत्म करने की मांग करने वाले सांसद पांडा पर निशाना साधते हुए कहा है कि संसद की कैंटीन का इस्तेमाल करने वाले सांसदों की संख्या बमुश्किल 10 फीसदी है।

अल्पसंख्यक और संसदीय मामलों के राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि बड़ा व्यापारी होने के कारण सांसद पांडा ऐसा कह सकते हैं।

हालांकि उन्हें पता होना चाहिए कि कैंटीन का इस्तेमाल करने वालों में ज्यादा संख्या संसद के कर्मचारी, सुरक्षाकर्मियों की है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में फैसला करने का अधिकार सरकार का नहीं बल्कि राज्यसभा और लोकसभा सचिवालय का है।

संसद के खाने पर सब्सिडी खत्म करने की मांग

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संसद की कैंटीन में सस्ता खाना संबंधी मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद बीजेडी सांसद ने स्पीकर को पत्र लिख कर इस मद में दी जा रही सब्सिडी खत्म करने की मांग की है।

पत्र में उन्होंने लिखा है कि अगर लाखों लोग गरीबों के लिए रसोई गैस की सब्सिडी छोड़ सकते हैं तो हम सांसद क्यों नहीं। उन्होंने यह भी लिखा है कि सांसदों पर जनता का भरोसा कायम करने और विश्वसनीयता बनाए रखने केलिए ऐसा किया जाना बेहद जरूरी है।

इस संबंध में केसी त्यागी ने कहा कि इस बारे में दोनों सदनों से जुड़े सचिवालय को फैसला करना है। अगर सब्सिडी खत्म होने का फैसला किया जाता है तो उन्हें इस निर्णय पर कोई एतराज नहीं होगा। निजी बातचीत में कई दलों के सांसदों ने भी सब्सिडी खत्म करने की मांग की।

इनका कहना था कि असलियत में कैंटीन का उपयोग करने वाले सांसदों की संख्या बेहद कम है। संसद के खाने का उपयोग इसके कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और पत्रकार करते हैं। इसके बावजूद चूंकि सांसद बेवजह इस मामले में निशाने पर हैं, इसलिए सब्सिडी को बंद कर दिया जाना चाहिए।

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