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अब निजी स्कूलों में भी मिलेगा मिड-डे मील
नई दिल्ली/बृजेश सिंह
Updated Thu, 31 Jan 2013 08:38 PM IST
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केंद्र सरकार ने वर्ष 2013-14 से मिड-डे मील का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। इस विस्तार के पहले चरण में जनजाति, दलित तथा मुसलिम बहुल जिलों में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी मिड-डे मील योजना में शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा जिन सरकारी प्राइमरी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं चलती हैं, वहां प्री-प्राइमरी के बच्चों को भी दोपहर में मिड-डे मील दिया जाएगा।
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चालू वित्त वर्ष में मिड-डे मील योजना पर केंद्र सरकार ने कुल 12000 करोड़ रुपये देश के सभी राज्यों को उपलब्ध कराए थे। अभी तक यह योजना केवल सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से आठवीं तक के बच्चों के लिए थी। अब इसका दायरा बढ़ाने तथा अन्य मदों में खर्च बढ़ने के कारण अगले बजट में 18000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने वर्ष 2007-08 में जब मिड-डे मील योजना शुरू की थी तो पहले साल इस मद में केंद्र ने कुल 5835 करोड़ रुपये जारी किए थे। तब से लगातार साल दर साल योजना के विस्तार के साथ ही इस मद में बजट बढ़ता जा रहा है।
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यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में मिड-डे मील योजना को सरकार की विशेष उपलब्धियों के रूप में पेश किया गया था। अब यह योजना सरकारी स्कूलों तक सीमित न रहकर निजी स्कूलों के बच्चों के लिए भी लागू की जा रही है।
यही नहीं जानकारी के अनुसार आरटीई के तहत कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में आरक्षित पच्चीस प्रतिशत सीटों पर पढ़ रहे छात्रों को भी मिड-डे मील योजना का लाभ देने पर सहमति बन चुकी है। ऐसे स्कूलों में बच्चों को सीधे खाना देने के बजाय नकद भुगतान देने पर विचार किया जा रहा है। ऐसा इसलिए है कि निजी स्कूलों में केवल 25 फीसदी बच्चों के लिए किसी एजेंसी द्वारा दोपहर खाना उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं होगा।