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लालू शुरू करेंगे नई पारी, कई चुनौतियां
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 17 Dec 2013 11:02 AM IST
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चारा घोटाले में दस हफ्ते जेल में बिताने के बाद बाहर आए राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव अब नए सिरे से अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करेंगे।
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इस छोटी सी ही अवधि में बिहार की राजनीति में आए बड़े बदलाव ने उनकी नई पारी के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। चूंकि लालू खुद चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, इसलिए अपनी साख बचाने के लिए उनके सामने पार्टी की साख बचाए रखना जरूरी है।
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फिर इस दौरान जहां राजद की लोजपा के साथ खटपट चरम पर है, तो वहीं खुद लस्तपस्त पड़ी कांग्रेस से चुनाव पूर्व गठबंधन भी अब चुनाव में जोरदार प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जा रहा।
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जाहिर है कि इस नई राजनीतिक परिस्थिति में राजद को अकेले और अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने की भी तैयारी करनी होगी। यही कारण है कि जेल से निकलने के बाद लालू की योजना राज्य के हर जिले में बड़ी रैलियों का आयोजन करने की है।
भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार की लगातार मुखालफत कर जदयू जहां लालू के माय (मुस्लिम और यादव) समीकरण को ध्वस्त करने की मुहिम पर है। वहीं इस दौरान राजद और लोजपा के मतभेद भी सड़क पर आ गए हैं।
राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने जहां लोजपा को सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की सलाह दी थी तो वहीं लोजपा ने भी पलटवार करते हुए इसके लिए तैयार रहने की घोषणा की थी। राजद सूत्रों के मुताबिक लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान की इच्छा चुनावों में भाजपा के साथ जाने की है।
चुनाव में बेहद बुरे प्रदर्शन के कारण जदयू और कांग्रेस के बीच बढ़ी दूरी ने कांग्रेस के राजद के करीब आने की संभावना बढ़ाई है। मगर खुद लस्तपस्त पड़ी कांग्रेस राजद और लालू की पुरानी साख बहाल करने में कितनी सहायक सिद्ध होगी, इस पर भी पार्टी में गंभीर मंथन जारी है।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस में पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी और उनके विश्वस्त अब भी जदयू से गठबंधन के पक्षधर हैं। यह धड़ा इसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मनाने का पक्षधर है। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित कई बड़े नेताओं की सहानुभूति लालू के साथ कायम है।