अब डेढ़ मीटर दूर से ही पता चल जाएगी हृदय की गति
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मरीज के हृदय की गति, हृदय के स्वास्थ्य के बारे में अब डाक्टर को डेढ़ मीटर की दूरी से भी पता चल सकता है। अब हृदय रोगियों को ईसीजी मशीन तक ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
आईएमएस बीएचयू और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने मिलकर ईसीजी के विकल्प के तौर पर ऐसे उपकरण का ईजाद किया है। इस उपकरण से बिना मरीज के संपर्क में आए, बिना कपड़े खोले ही हृदय की गतिविधि का सटीक परीक्षण किया जा सकता है। ये उपकरण सस्ता होने के साथ साथ पूरी तरह से पोर्टेबल है।
इस उपकरण को इंडो कोरिया परियोजना के तहत बीएचयू के डीएसटी अंतरविषयी गणितीय विज्ञान केंद्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार सिंह, केंद्र के समन्वयक प्रो. उमेश सिंह, दक्षिण कोरिया के ग्वांगजू इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी के रिसर्च असिस्टेंट आशीष कुमार सिंह ने चिप के रूप में विकसित किया है।
डॉपलर प्रभाव के सिद्धांत पर करता है काम
ये टीम अब इसे मोबाइल के सिम के आकार का बनाना जा रहा है ताकि इसे मोबाइल में लगाकर हृदय की गतिविधि का पता लगाया जा सके। इस प्रोजेक्ट के प्रधान अन्वेषक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि ये उपकरण माइक्रोवेव राडार के माध्यम से काम करता है जो शरीर को स्पर्श किए बिना तरंगों के माध्यम से हृदय की स्थिति का पता लगाएगा।
ये माइक्रोवेव के डॉपलर प्रभाव के सिद्धांत पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इस उपकरण को बनाने में ढाई सौ रुपये लागत आई है। बताया कि प्राकृतिक आपदा व दुर्घटना में घायल मरीजों के इलाज के लिए ये उपकरण खास होगा। बता दें कि इस परियोजना के तहत 2012 में इस पर काम शुरू हुआ और मार्च 2015 में ये परियोजना पूरी हुई।