फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   now governor of punjab will not be chandigarh administrator

अब पंजाब के राज्यपाल नहीं होंगे चंडीगढ़ प्रशासक

Thu, 20 Sep 2012 12:41 PM IST
चंडीगढ़/अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 20 Sep 2012 12:41 PM IST
विज्ञापन
now governor of punjab will not be chandigarh administrator
यूटी अब डिस्टर्ब एरिया (अशांत क्षेत्र) नहीं रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 2 दिसंबर, 1986 और 5 दिसंबर, 1991 को जारी डिस्टर्ब एरिया घोषित करने वाली अधिसूचनाएं रद कर दी हैं। कार्यवाहक चीफ जस्टिस जसबीर सिंह एवं जस्टिस एके जैन की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर बुधवार को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद अब चंडीगढ़ में 28 साल बाद चीफ कमिश्नर नियुक्त किया जाएगा। अभी तक पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के प्रशासक की भूमिका निभा रहे थे।
विज्ञापन


चंडीगढ़ निवासी सुरेंद्र भारद्वाज ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर डिस्टर्ब एरिया एक्ट की अधिसूचनाएं रद करने का आग्रह किया था। याचिका में दलील दी गई कि पंजाब में आतंकवाद के दौरान चंडीगढ़ में भी डिस्टर्ब एरिया एक्ट लागू किया गया था। पंजाब ने तो अक्तूबर, 1997 और जुलाई, 2008 में अधिसूचनाएं वापिस ले लीं, लेकिन चंडीगढ़ में यह अभी तक लागू हैं।
विज्ञापन


याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे कोई मजबूत कारण नजर नहीं आते हैं, जिससे चंडीगढ़ के साथ डिस्टर्ब एरिया का टैग जोड़ा जाए। खंडपीठ ने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के दौर में स्पेशल आर्म फोर्स एक्ट और डिस्टर्ब एरिया एक्ट लागू किया गया था। आतंकवाद की काली छाया छंटने के बाद पंजाब सरकार ने अक्तूबर, 1997 में पंजाब के तीन जिले (अमृतसर, गुरदासपुर और फिरोजपुर) छोड़कर एक्ट वापिस ले लिया। लेकिन बाद में इन तीनों जिलों से भी यह एक्ट 20 जुलाई, 2008 को वापिस ले लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


खंडपीठ ने कहा कि यह सभी जानते हैं कि आतंकवाद के काले दौर में चंडीगढ़ पर भी आतंकी लपटें गिरी हैं, लेकिन उस दौर के गुजरने के बाद चंडीगढ़ पूरी तरह शांत रहा है। यूटी प्रशासन की इंटेलिजेंस रिपोर्ट की दलीलों की प्रमाणिकता पर विश्वास नहीं कर सकते क्योंकि ऐसी किसी भी घटना का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। आतंकवाद से लड़ने वाले सैकड़ों परिवारों के यहां रहने और बुड़ैल जेल में खूंखार आतंकियों के होने की दलील पर भी डिस्टर्ब एरिया एक्ट लागू रखना उचित नहीं है।   


खंडपीठ ने कुछ यूं नकारा एक्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि देश में ऐसी कई राजधानियां और इलाके हैं, जिनके हालात चंडीगढ़ की तुलना में कई गुना बदतर हैं, लेकिन वहां कहीं भी डिस्टर्ब एरिया एक्ट का कोई टैग नहीं लगाया गया है। साथ ही कहा कि डिस्टर्ब एरिया का टैग अंतरराष्ट्रीय टूरिस्ट मानचित्र में चंडीगढ़ की छवि खराब कर रहा है। डिस्टर्ब एरिया की बात सुनते ही विदेशी सैलानी बेवजह खौफ में आ जाते हैं और यहां ठहरना पसंद नहीं करते। इस टैग से टूरिज्म पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

इतिहास के झरोखे से खास तारीखें
- केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2 दिसंबर, 1986 और 5 दिसंबर, 1991 को जारी की थी डिस्टर्ब एरिया एक्ट की अधिसूचना।
- पंजाब ने अक्तूबर, 1997 और जुलाई, 2008 में वापिस ले लीं थीं अधिसूचनाएं।

हाईकोर्ट की खास टिप्पणियां
- चंडीगढ़ के साथ डिस्टर्ब एरिया का टैग जोड़ने की मजबूत वजह नहीं।
- देश की कई राजधानियों और इलाकों में चंडीगढ़ से बदतर हालात
- चंडीगढ़ पूरे देश में बेस्ट प्लान सिटी है और इससे नेगिटिव शेड हटाना वक्त की जरूरत है।
- यूटी प्रशासन की इंटेलिजेंस रिपोर्ट की दलीलों की प्रमाणिकता पर विश्वास नहीं कर सकते।

यह झेल रही थी सिटी ब्यूटीफुल
- डिस्टर्ब एरिया एक्ट के कारण शहर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की गई थी।
- अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ रहा था।
- अधिकारियों के हाथों में शक्तियां आ गई थीं, इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
- विदेशी टूरिस्ट यहां आने से घबराते थे। वे इसे आतंकी इलाका समझते हैं।
- पंजाब के राज्यपाल ही प्रशासक की भूमिका निभा रहे थे, 28 सालों से नहीं हो पाई चीफ कमिश्नर की नियुक्ति।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed