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भड़काऊ भाषण पर सुप्रीम कोर्ट ने खड़े किए हाथ

Tue, 04 Mar 2014 10:19 AM IST
Updated Tue, 04 Mar 2014 10:19 AM IST
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Now, give fiercely hate speech, no one will stop!

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह राजनीतिक नेताओं को भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले भाषण देने से नहीं रोक सकता। इस सिलसिले में दायर एक जनहित याचिका पर फैसला करते हुए उसने कहा कि ऐसा करके लोगों को मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में अड़ंगा नहीं डाल सकता।

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जस्टिस आर एम लोढ़ा की बेंच ने राजनीतिक नेताओं के भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले भाषणों को रोकने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम लोगों के मौलिक अधिकारों में कटौती नहीं कर सकते। यह संविधान की ओर दिया गया बेशकीमती अधिकार है। भारत एक परिपक्व लोकतंत्र हैं। लिहाजा यहां लोगों को फैसला लेने दें।

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भड़काऊ भाषण किसी को अच्छा भी लगता होगा!

Now, give fiercely hate speech, no one will stop!

जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि यह नजरिए का मामला है। किसी को आपत्तिजनक लगने वाला कोई बयान, दूसरे को सामान्य लग सकता है। हमारे देश में एक अरब बीस करोड़ लोग हैं और इतने ही मत भी।

किसी भी शख्स पर किसी दूसरे का विचार लादा नहीं जा सकता। गौरतलब है कि इस मामले में याचिका दायर करने वाले वकील एम एल शर्मा ने कहा था कि कई नेता नफरत फैलाने वाले भाषण देकर राजनीतिक लाभ लेते हैं। इन्हें रोका जाना चाहिए।

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