राहुल के बाद दिग्गी ने छेड़ा प्रियंका राग
उन्होंने कहा है कि पार्टी में लगातार प्रियंका की जरूरत महसूस की जा रही है। अगर वह पार्टी में आती हैं तो नेता ही नहीं, बल्कि एक-एक कार्यकर्ता उनका स्वागत करेगा।
अमर उजाला से खास बातचीत में सोमवार को दिग्विजय सिंह ने प्रियंका को पार्टी में लाने की जोरदार वकालत की, लेकिन साथ ही कहा कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला उनका परिवार करेगा। जहां तक पार्टी की बात है तो कोई भी प्रियंका के विरोध में नहीं है। उन्हें हर ओर से समर्थन मिलेगा।
इसके साथ ही दिग्विजय सिंह राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान सौंपने के अपने बयान पर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनी थीं। इसके बाद उन्होंने पार्टी को बड़ी कामयाबी दिलाई। अगर राहुल गांधी पर भरोसा जताया गया तो निश्चित तौर पर वह भी पार्टी को सफलता की राह पर ले जाएंगे।
दिग्विजय सिंह के इन बयानों को विश्लेषक पार्टी के भीतर वर्चस्व की लड़ाई में दिग्गी राजा की चतुर पैंतरेबाजी के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि वे राहुल और प्रियंका के बहाने अपनी एक खास जगह बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
राहुल को पार्टी की कमान सौंपने की कही थी बात
दरअसल, कांग्रेस में प्रियंका की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। पार्टी का एक बड़ा तबका राहुल को पार्टी की कमान सौंपने के विरोध में है, लेकिन प्रियंका की बात अलग है। दिग्विजय सिंह द्वारा राहुल को कांग्रेस की कमान सौंपने की मांग करते ही पार्टी में बवाल मच गया।
पार्टी के नए से पुराने नेताओं तक ने दिग्गी को निशाने पर ले लिया। दरअसल, विरोध दिग्विजय के बहाने कांग्रेस उपाध्यक्ष की ताजपोशी का किया जा रहा है, लेकिन प्रियंका के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं है। पार्टी पूरी तरह से प्रियंका के स्वागत के लिए तैयार है।
आम राय है कि प्रियंका में राहुल से बेहतर नेतृत्व क्षमता है। इसके बावजूद उन्हें पार्टी में लाने में दिख रही हिचकिचाहट के बारे में पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह पूरी तरह से गांधी परिवार का मामला है। प्रियंका पार्टी में आएंगी अथवा नहीं इसका फैसला परिवार को करना है। जहां तक पार्टी की बात है तो हर कोई उनका स्वागत करेगा।