अब हर महीने नहीं बढ़ेगे डीजल के दाम!
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आम आदमी की जेब पर फिलहाल डीजल मूल्यवृद्धि की मार नहीं पड़ेगी। नई सरकार ने अगर आंशिक इजाफे की मौजूदा प्रक्रिया को बंद कर दिया तो डीजल के दाम में प्रत्येक माह 50 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि बंद हो जाएगी।
तेल कंपनियों ने डीजल की कीमतों में आंशिक इजाफे के सिलसिले को स्थगित कर दिया है। माना जा रहा है कि केंद्र में आने वाली नई सरकार ही अब इस मामले में कोई निर्णय लेगी।
दरअसल डीजल के दाम बढ़ाने को लेकर चुनाव आयोग से अब तक पेट्रोलियम मंत्रालय को हरी झंडी का इंतजार है। इंडियन ऑयल कारपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डीजल मूल्य की समीक्षा को लेकर फिलहाल मंत्रालय की ओर से कोई संकेत नहीं दिया गया है।
डीजल बिक्री पर हो रहा नुकसान
डीजल बिक्री पर हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए पिछले साल मंत्रालय ने तेल कंपनियों को आंशिक वृद्धि की छूट दी थी, लेकिन सरकार की सहमति पर नियमित रूप से दाम बढ़ाने की प्रक्रिया चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद भी जारी रहेगी या नहीं इस पर चुनाव आयोग से राय मांगी गई थी, जो कि अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है।
डीजल बिक्री पर 47,655 करोड़ रुपए का नुकसान
फिलहाल डीजल बिक्री पर तेल कंपनियों को 5.49 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। हालांकि रुपये की मजबूती की वजह से पिछले पंद्रह दिनों में डीजल पर नुकसान कम हुआ है। 1 अप्रैल को डीजल अंडर रिकवरी 5.93 रुपये प्रति लीटर आंकी गई थी।
मंत्रालय के मुताबिक डीजल के दाम में नियमित आंशिक इजाफे के बावजूद पिछले वित्त वर्ष के पहले नौ माह में डीजल बिक्री पर 47,655 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
जानकारों का कहना है कि अगर डीजल के दाम में आंशिक वृद्धि का सिलसिला थम जाता है तो इससे खुदरा बिक्री पर काफी नुकसान होगा। सरकार पर भी डीजल सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा। इसलिए केंद्र में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार बने आंशिक मूल्यवृद्धि की नीति में बदलाव हितकर नहीं होगा।