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100 दिनों में कमजोर हो गया कांग्रेस हाईकमान

Sat, 20 Sep 2014 08:27 PM IST
Updated Sat, 20 Sep 2014 08:27 PM IST
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now congress become very weak but why?

लोकसभा चुनावों के चार महीने बाद कांग्रेस हाईकमान को हर रोज एक नई मुसीबत और चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। मगर चुनौतियों को डटकर सामने करने की बजाय दिक्कत यह हो रही है कि जो हाईकमान कभी पार्टी में ही नहीं बल्कि यूपीए सरकार के अंदर सबसे ज्यादा ताकतवर होता था, वह अब लगातार कमजोर हो रहा है।

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राज्यों में नकारे और विवादास्पद मुख्यमंत्रियों को हटाने से लेकर विवादित बयान देकर शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साध रहे बड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के मामले में पार्टी का हाईकमान लगातार पीछे हट रहा है।
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ताजा मामला महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस के टिकट बंटवारे को लेकर है। यहां दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री बिना किसी की परवाह किए खुलकर अपने वफादारों और भाई भतीजों को टिकट बांट रहे हैं और इनकी सिफारिश पर हाईकमान ही मुहर लगाने को विवश हो रहा है।
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कांग्रेस में अपनों के खिलाफ ही बगावत

now congress become very weak but why?

हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को हटाने की लाख मांग के बावजूद हाईकमान ने सिर्फ इस वजह से हटाने की बात को दिमाग से निकाल दिया क्योंकि उन्हें लगता था कि हटाने के बाद ये दोनों मुख्यमंत्री उन पर ही अंगुली उठा सकते हैं।

असम में अगले साल चुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के खिलाफ पार्टी के नेता ही नहीं बल्कि जनता का गुस्सा भी बहुत ज्यादा है। मगर अपनी कमजोर सियासी पिच के सामने हाईकमान उन्हें हटाने का कदम उठाने से पीछे हटा गया।

राहुल गांधी के खिलाफ दे रहे नेता बयान

now congress become very weak but why?

हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामले और उनकी बढ़ती उम्र को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस में खासा असंतोष है। उन्हें हटाने के विकल्प को पार्टी हाईकमान सोचना भी चाहता है।

मगर वीरभद्र की प्रदेश विधायकों पर पकड़ और बगावत के डर से हाईकमान ने चुप्पी साध रखी है। इसी तरह राहुल गांधी के खिलाफ बयान देने वाले नेताओं को लेकर प्रियंका गांधी बेहद नाराज हैं।

मगर फिर भी पार्टी की नाजुक स्थिति को देखते हुए पार्टी बड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रही है। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि राहुल के खिलाफ बयान दे रहे बुजुर्ग नेताओं को दबाव में लाने के लिए हाईकमान को पार्टी के युवा राष्ट्रीय सचिवों की मदद लेनी पड़ी। इन युवा सचिवों को प्रियंका गांधी का पूरा समर्थन था।

जिम्मेदारी नहीं निभाने वाले नेताओं को नहीं हटा पा रहा कांग्रेस
सोनिया और राहुल गांधी के कुछ करीबी नेताओं का कहना है कि संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां देने के बावजूद कामकाज में खरे नहीं उतर रहे कई बड़े नेताओं को हाईकमान हटाना चाहता है।

लेकिन चाहकर भी इन नेताओं को संगठन में होने वाले फेरबदल में हटाने में हाईकमान को दिक्कत हो रही है। शायद कुछ नेताओं को इस हिचकिचाहट का फायदा भी मिल सकता है।

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