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दूध और तेल में मिलावट की अब घ्ार पर ही करिए जांच
नई दिल्ली/विजय गुप्ता
Updated Fri, 05 Oct 2012 01:56 AM IST
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दूध, दुग्ध उत्पाद, खाद्य तेल और बेसन सहित अन्य खाद्य वस्तुओं में मिलावट की जानकारी अब घर बैठे स्वयं की जा सकेगी। खाद्य वस्तुओं में मिलावट की जांच के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने एक सस्ती तकनीक विकसित कर ली है। इसके जरिए न सिर्फ खाद्य वस्तुओं में किसी भी तरह की मिलावट का पता आसानी से लगाया जा सकेगा। बल्कि यह भी जानकारी हो सकेगी कि खाद्य पदार्थ में रसायन या अन्य किसी वस्तु की मिलावट की गई है।
पहले चरण में वैज्ञानिकों ने दूध में मिलावट की जानकारी के लिए दो अलग-अलग तकनीकों को सार्वजनिक किया है। इसके तहत पहली तकनीक में दूध में 11 तरह की मिलावट की जांच की जा सकती है जबकि दूसरी तकनीक से बाजार में मौजूद 28 तरह के विभिन्न ब्रांडों के डिटरजेंट की जानकारी तत्काल मिल सकेगी। दूध में मिलावट की जांच के लिए विकसित की गई तकनीक को राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है।
एनडीआरआई के निदेशक डॉ अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दूध व दुग्ध उत्पादों में मिलावट की जानकारी के लिए विकसित की गई पहली तकनीक से यूरिया, स्टार्च, गंदे पानी, शुगर, पामोलीन, हाइड्रोजन पैरासाइट सहित 11 तरह की मिलावट की जांच हो सकती है। इस तकनीक को किट के रूप में बनाया गया है। डेयरियों और हलवाइयों के लिए ये किट सर्वाधिक उपयोगी है। संस्थान ने इस किट की कीमत 5000 रुपये रखी है। एक किट में उपरोक्त में से कोई भी छह मिलावट की जांच की जा सकती है। किसी भी एक मिलावट की जांच 70 से 80 दफा की जा सकती है।
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वहीं डिटरजेंट की जांच के लिए तैयार किट का उपयोग आम आदमी स्वयं कर सकेंगे। इस किट को पशु-जीव रसायन विभाग के अध्यक्ष डॉ वाईएस राजपूत ने विकसित किया है। एक दफा जांच में लगभग 3.10 रुपये का खर्च आता है। मिलावट की जानकारी किट में लगी ट्यूब में प्रदर्शित होने वाले रंग के जरिए होती है। यदि रंग नीला होता है तो डिटरजेंट की मिलावट है और यदि रंग हल्का बैगनी तो मिलावट नहीं है।
हालांकि यह किट सीधे तौर पर अभी उपलब्ध नहीं है। इसकी बिक्री की जिम्मेदारी मदर डेयरी को सौंपी गई है। मदर डेयरी अपने ब्रांड से इसकी बिक्री जल्द शुरू करेगी। उन्होंने बताया कि एनडीआरआई ने दूध में मिलावट को रोकने के लिए हलवाइयों को प्रशिक्षित करने का अभियान शुरू किया है। पंजाब से इसकी शुरूआत की गई है। हलवाई एनडीआरआई की तकनीक के जरिए दूध में मिलावट की जानकारी कर सकेंगे।
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पहले चरण में वैज्ञानिकों ने दूध में मिलावट की जानकारी के लिए दो अलग-अलग तकनीकों को सार्वजनिक किया है। इसके तहत पहली तकनीक में दूध में 11 तरह की मिलावट की जांच की जा सकती है जबकि दूसरी तकनीक से बाजार में मौजूद 28 तरह के विभिन्न ब्रांडों के डिटरजेंट की जानकारी तत्काल मिल सकेगी। दूध में मिलावट की जांच के लिए विकसित की गई तकनीक को राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है।
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एनडीआरआई के निदेशक डॉ अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दूध व दुग्ध उत्पादों में मिलावट की जानकारी के लिए विकसित की गई पहली तकनीक से यूरिया, स्टार्च, गंदे पानी, शुगर, पामोलीन, हाइड्रोजन पैरासाइट सहित 11 तरह की मिलावट की जांच हो सकती है। इस तकनीक को किट के रूप में बनाया गया है। डेयरियों और हलवाइयों के लिए ये किट सर्वाधिक उपयोगी है। संस्थान ने इस किट की कीमत 5000 रुपये रखी है। एक किट में उपरोक्त में से कोई भी छह मिलावट की जांच की जा सकती है। किसी भी एक मिलावट की जांच 70 से 80 दफा की जा सकती है।
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वहीं डिटरजेंट की जांच के लिए तैयार किट का उपयोग आम आदमी स्वयं कर सकेंगे। इस किट को पशु-जीव रसायन विभाग के अध्यक्ष डॉ वाईएस राजपूत ने विकसित किया है। एक दफा जांच में लगभग 3.10 रुपये का खर्च आता है। मिलावट की जानकारी किट में लगी ट्यूब में प्रदर्शित होने वाले रंग के जरिए होती है। यदि रंग नीला होता है तो डिटरजेंट की मिलावट है और यदि रंग हल्का बैगनी तो मिलावट नहीं है।
हालांकि यह किट सीधे तौर पर अभी उपलब्ध नहीं है। इसकी बिक्री की जिम्मेदारी मदर डेयरी को सौंपी गई है। मदर डेयरी अपने ब्रांड से इसकी बिक्री जल्द शुरू करेगी। उन्होंने बताया कि एनडीआरआई ने दूध में मिलावट को रोकने के लिए हलवाइयों को प्रशिक्षित करने का अभियान शुरू किया है। पंजाब से इसकी शुरूआत की गई है। हलवाई एनडीआरआई की तकनीक के जरिए दूध में मिलावट की जानकारी कर सकेंगे।