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अब पता लगाइए कौन कितने पानी में, पहला भू-जल नक्शा जारी
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Fri, 28 Sep 2012 08:33 PM IST
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देश का पहला भू-जल नक्शा शुक्रवार को जारी कर दिया गया। इसमें शामिल आंकड़ों के अनुसार जहां दिल्ली में कई जगहों पर जमीनी जलस्तर बेहद तेजी से घटा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में भी कमोबेश यही हालात हैं।
वहीं हिमाचल प्रदेश देश में सबसे अधिक जमीनी जलस्तर वाला राज्य है, जहां इस्तेमाल किए गए पानी की पूर्ति जल्द हो जाती है। भारत के लगभग हर हिस्से के भूजल स्तर के बारे में गहन जानकारी देने वाला यह नक्शा अपनी तरह का पहला प्रयास है। सेंट्रल ग्राउंडवाटर बोर्ड ने यह नक्शा तैयार किया है।
इसके अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में हालात बेहद खराब हैं। इस बारे में सेंट्रल ग्राउंडवाटर बोर्ड के चेयरमैन एससी धीमान ने कहा कि अरावली की पहाड़ियों पर निर्माणकार्य होने के कारण इस तरह की स्थितियां बनी हैं। धीमान के अनुसार बढ़ती जनसंख्या, पानी के अत्यधिक इस्तेमाल और मिट्टी की प्रकृति के चलते वाटर रिचार्ज सिस्टम काफी धीमा हो गया है, जिससे जलस्तर में कमी देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत के पहाड़ी इलाके भी जलस्तर में कमी का सामना कर रहे हैं, लेकिन वहां रिचार्ज सिस्टम अच्छा होने के चलते हालात काबू में आ जाते हैं।
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जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल ने बताया कि यह अच्छा प्रयास है, लेकिन भूजल नक्शे के दायरे में देश के सभी गांव होते तो इससे आम लोगों के साथ-साथ किसानों को भी बहुत लाभ होता। उन्हें अपने क्षेत्रों के जलस्तर को अच्छी तरह समझने का मौका मिलता। फिलहाल इस नक्शे में 14 मुख्य और 42 बड़े जलाशय शामिल किए गए हैं। इसके अलावा बंसल ने हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और मेघालय के भूजल नक्शे भी जारी किए।
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वहीं हिमाचल प्रदेश देश में सबसे अधिक जमीनी जलस्तर वाला राज्य है, जहां इस्तेमाल किए गए पानी की पूर्ति जल्द हो जाती है। भारत के लगभग हर हिस्से के भूजल स्तर के बारे में गहन जानकारी देने वाला यह नक्शा अपनी तरह का पहला प्रयास है। सेंट्रल ग्राउंडवाटर बोर्ड ने यह नक्शा तैयार किया है।
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इसके अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में हालात बेहद खराब हैं। इस बारे में सेंट्रल ग्राउंडवाटर बोर्ड के चेयरमैन एससी धीमान ने कहा कि अरावली की पहाड़ियों पर निर्माणकार्य होने के कारण इस तरह की स्थितियां बनी हैं। धीमान के अनुसार बढ़ती जनसंख्या, पानी के अत्यधिक इस्तेमाल और मिट्टी की प्रकृति के चलते वाटर रिचार्ज सिस्टम काफी धीमा हो गया है, जिससे जलस्तर में कमी देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत के पहाड़ी इलाके भी जलस्तर में कमी का सामना कर रहे हैं, लेकिन वहां रिचार्ज सिस्टम अच्छा होने के चलते हालात काबू में आ जाते हैं।
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जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल ने बताया कि यह अच्छा प्रयास है, लेकिन भूजल नक्शे के दायरे में देश के सभी गांव होते तो इससे आम लोगों के साथ-साथ किसानों को भी बहुत लाभ होता। उन्हें अपने क्षेत्रों के जलस्तर को अच्छी तरह समझने का मौका मिलता। फिलहाल इस नक्शे में 14 मुख्य और 42 बड़े जलाशय शामिल किए गए हैं। इसके अलावा बंसल ने हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और मेघालय के भूजल नक्शे भी जारी किए।