अब जन्म के समय ही बच्चे को मिल सकता है 'दलित' का दर्जा
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सरकार जाति प्रमाण पत्र हासिल करने में होने वाली दिक्कतों को दूर करने का प्रयास कर रही है। इस क्रम में प्रशिक्षण एवं कार्मिक विभाग (डीओपीटी) ने राज्यों के लिए दिशानिर्देशों का जो मसौदा तैयार किया है, उसके अनुसार बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र पर ही उनके दलित होने की मुहर लग जाएगी। साथ ही एससी और एसटी विद्यार्थियों को कक्षा आठ में पढ़ाई के दौरान ही जाति और निवास प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया जाएगा।
मसौदे के अनुसार प्रमाण पत्र बनवाने के लिए स्कूल प्रमुख या हेडमास्टर आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों से जरूरी दस्तावेज लेंगे। इस प्रक्रिया के लिए सितंबर-अक्तूबर या कोई भी दो महीना तय कर लिया जाएगा। इस बारे में राज्य को निर्णय लेना है। एससी, एसटी विद्यार्थियों से लिए गए दस्तावेजों को राज्य सरकार के संबंधित विभाग या राजस्व अथॉरिटीज के पास जमा कराना स्कूल की जिम्मेदारी होगी।
इसके बाद अधिकारी उन दस्तावेजों की जांच करेंगे और 30 से 60 दिनों के भीतर प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाएंगे। यदि किसी छात्र का सर्टिफिकेट खारिज किया जाता है तो इसके लिए कारण बताने होंगे।
नौकरी में मिलेगी सहुलियत
मसौदे में एक साल के भीतर अपील करने का भी प्रावधान रखा गया है। डीओपीटी ने इस मसौदे पर सभी पक्षों से 21 दिसंबर तक प्रतिक्रिया मांगी है।
डीओपीटी के मसौदे में कहा गया है कि एससी/एसटी अभ्यर्थियों को शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और केंद्र सरकार की नौकरियों में निवास एवं जाति प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ती है। शिक्षण संस्थानों में डोमिसाइल कोटा का लाभ लेने के लिए प्रमाण पत्र को सुबूत के तौर पर प्रस्तुत करना पड़ता है।
वहां भी इसकी जरूरत पड़ती है, जहां नौकरी में स्थानीय निवासी को वरीयता दी जाती है। उस वक्त प्रमाण पत्र के लिए अभ्यर्थी को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। मसौदे के अनुसार यदि पढ़ाई के दौरान ही एससी/एसटी विद्यार्थियों के प्रमाण पत्र बन जाते हैं तो उन्हें आगे चलकर दिक्कत नहीं होगी।