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केजरीवाल से बेफिक्र क्यों हो गई भाजपा?

Thu, 01 May 2014 05:59 PM IST
Updated Thu, 01 May 2014 05:59 PM IST
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now bjp become fearless from kejriwal

लोकसभा चुनाव के सात चरण पूरे होने के बाद भाजपा अब आम आदमी पार्टी के ‘भय’ से निश्चिंत सी दिख रही है।

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खासतौर पर वाराणसी में नरेंद्र मोदी के खिलाफ ताल ठोक रहे अरविंद केजरीवाल को भाजपा अब कोई खास चुनौती नहीं मान रही है। पार्टी का मानना है कि आप दिल्ली व आसपास के क्षेत्रों तक सिमटी रह गई है।

चुनाव की शुरुआत में भाजपा आशंकित थी कि दिल्ली की तरफ बढ़ते मोदी के रथ को कहीं केजरीवाल रोक न दें लेकिन अब 438 सीटों पर मतदान हो जाने के बाद पार्टी का आकलन है कि आप ने भाजपा से ज्यादा कांग्रेस का नुकसान किया है।

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आरएसएस ने दी थी आप से सावधान रहने की सलाह

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चुनावी दंगल शुरू होने से पहले भाजपा को आशंका थी कि आप पार्टी देशभर में खासतौर पर शहरी क्षेत्रों की 240 सीटों पर असर डाल सकती है।

इसी आशंका के चलते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी भाजपा को सलाह दी थी कि आप पार्टी को हल्के में नहीं लिया जाए। इसके बाद भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन में सतर्कता बरतनी शुरू कर दी थी।

पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी के अनुसार, आम आदमी पार्टी चुनाव में भाजपा को खास नुकसान नहीं पहुंचा पाई। उसका जितना बड़ा हौव्वा दिख रहा था, वह बेअसर साबित हो गया। बहरहाल, अब चुनाव को लेकर मिले फीडबैक से भाजपा उत्साहित है।

भाजपा मान रही, आप हुई बेअसर

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भाजपा का मानना है कि चुनाव के आगे बढ़ने के साथ ही आप पार्टी बेअसर होती चली गई। इसका असर दिल्ली समेत एनसीआर में ही रहा।

आप पार्टी के साथ वही लोग ज्यादा जुड़े हैं जो किसी भी सूरत में भाजपा को वोट नहीं देते हैं। इनमें वामपंथी विचारधारा के लोग ज्यादा हैं। जबकि अल्पसंख्यक समुदाय के केजरीवाल से जुड़ने से भाजपा खुश है।

हालांकि भाजपा चुनाव से पहले आप पार्टी से इस कदर भयभीत थी कि उसे दिल्ली में 17 से 19 जनवरी तक लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए बुलाई राष्ट्रीय कार्यकारिणी व राष्ट्रीय परिषद की बैठक में आप पार्टी की रणनीति की काट का रास्ता तलाशना पड़ा था।

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