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अब कोई भी बन सकता है ‘वैज्ञानिक’
महेंद्र तिवारी/लखनऊ
Updated Thu, 01 Nov 2012 08:31 AM IST
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अगर आपकी पढ़ाई हाईस्कूल या इंटरमीडिएट से आगे नहीं बढ़ पाई है लेकिन आप कल्पनाशील हैं, कोई ऐसा प्रयोग कर रहे हैं जिसकी वजह से आपके क्षेत्र और समाज को लाभ हो सकता है तो सरकार ऐसे सफल प्रयोगों को मान्यता देगी। यदि आप अपने प्रयोग को आगे बढ़ाना चाहेंगे तो उसके लिए तकनीकी और आर्थिक मदद भी मिलेगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने सूबे के जिलाधिकारियों से मौलिक खोज में लगे लोगों व उनके प्रयोगों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है।
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परिषद के संयुक्त निदेशक डीके श्रीवास्तव बताते हैं कि ऐसी खोज से जुड़े लोगों को इस योजना से जोड़ा जाना है, जिनकी किसी वजह से पढ़ाई-लिखाई तो आगे नहीं बढ़ पाई लेकिन वे बिना किसी बाहरी आर्थिक मदद व तकनीकी मदद के कुछ नया खोज रहे हैं। इसके अंतर्गत यदि गांव व शहर में जीवन संघर्ष के दौरान उन्हें कोई तरकीब सूझी और उससे नई तकनीक, जड़ी-बूटी आधारित पारंपरिक चिकित्सा पद्धति, उन्नत फसल प्रजाति, उन्नत किस्म के औजार व यंत्र, मशीनों में सुधार, ऊर्जा उत्पादन व संरक्षण की तकनीक विकसित करने में सफल हुए हैं तो शामिल किए जाएंगे।
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आर्थिक व तकनीकी मदद
इस तरह के मौलिक प्रयोग में लगे किसानों, शिल्पकारों, कारीगर-मिस्त्रियों, परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों से उपचार करने वालों के साथ ऐसे युवाओं को इस योजना के अंतर्गत आगे बढ़ाना है, जो संगठित क्षेत्र (व्यावसायिक पाठ्यक्रम जैसे इंजीनियरिंग, चिकित्सा इत्यादि पाठ्यक्रम से न जुड़े हों और स्नातक डिग्री धारक न हों) से न जुड़े हों। योजना में चयनित होने पर उन्हें आर्थिक व तकनीकी मदद उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे चाहेंगे तो अपनी खोज को खुद आगे बढ़ा सकेंगे। साथ ही संबंधित खोज को प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की भी योजना है।
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