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सवालों के घेरे में सीबीआई के सभी मामले
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 09 Nov 2013 08:21 AM IST
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पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को ‘तोता’ कह डाला। अब गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उसे असंवैधानिक करार दे दिया है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि अब तक जांच एजेंसी के शिकंजे में फंसे आरोपी ‘आजाद’ होने का सपना देखने लगे हैं।
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गुवाहाटी हाईकोर्ट के इस कदम ने टूजी और कोयला घोटाले समेत सभी छोटे-बड़े मामलों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
आलम यह है कि 1984 के सिख दंगों में फंसे कांग्रेसी सांसद सज्जन कुमार और टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपी ए राजा और स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर विनोद गोयनका ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए अपने खिलाफ सभी मामलों को बंद करने की गुहार लगाई है।
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उन्होंने इस मांग के लिए सीबीआई की संवैधानिकता पर उठे सवाल को आधार बनाया है। इस स्थिति में जज भी असमंजस में दिख रहे हैं और उन्होंने फिलहाल मामलों की सुनवाई टालना ही बेहतर समझा है।
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हाईकोर्ट के इस फैसले के एक दिन बाद 1984 के सिख दंगे के आरोपी सज्जन कुमार ने दिल्ली की अदालत में उन पर चल रहे सीबीआई के मुकदमे और दायर चार्जशीट को गैरकानूनी बताते हुए उसे खारिज करने की मांग उठा दी। हालांकि निचली अदालत ने इसे जल्दबाजी भरा कदम बताते हुए सज्जन के खिलाफ मुकदमा जारी रखने का हुक्म दिया है।
उधर, टूजी मामले में पटियाला हाउस स्थित सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी के समक्ष पेश आरोपी ए राजा, स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर विनोद गोयनका के अधिवक्ता ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने सीबीआई के गठन पर ही सवाल उठाए हैं, ऐसे में उनके मुवक्किलों के खिलाफ दायर आरोप पत्र गैरकानूनी है। इसलिए सुनवाई बंद हो या उस पर रोक लगाई जाए। इस पर सरकारी वकील ने कहा कि इस मुद्दे पर सीबीआई से दिशानिर्देश लेना पड़ेगा।
पटियाला हाउस स्थित सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा और वीके गुप्ता की अदालत में भी कई मामलों में वकीलों ने गुवाहाटी अदालत के फैसले का हवाला दिया, लेकिन उन्होंने भी फिलहाल कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। सभी अदालतें अब सरकार के रवैये पर निगाह रखे हुए हैं।
हालांकि केंद्र सरकार ने सीबीआई के अस्तित्व को बचाने के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला कर लिया है। लेकिन इस फैसले ने सीबीआई जांच में घिरे लोगों को फौरी राहत की रोशनी दिखा दी है।
राजनीतिक और सामाजिक तौर पर बेहद संवेदनशील टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला, कोयला घोटाला, आरुषि हत्याकांड, निठारी हत्याकांड, चारा घोटाला, यूपी का एनआरएचएम घोटाला आदि जैसे सैकड़ों मामलों के बचाव पक्ष इस फैसले की आड़ में राहत की उम्मीद लगा बैठे हैं।
सीबीआई वैध संस्था
सीबीआई का मानना है कि अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फैसले का अध्ययन किया जाना जरूरी है। सीबीआई ने भरोसा जताया है कि सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के बाद मामला पूरी तरह साफ हो जाएगा। इस फैसले की प्रतिक्रिया में सीबीआई ने कहा कि यह दिल्ली स्पेशल पुलिस स्टैबलिशमेंट एक्ट (डीपीएसए), 1946 के तहत पूरी तरह से वैध संस्था है। डीपीएसए के द्वारा ही इसे भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों के जांच करने की ताकत मिली है।
आईपैड पर दिखाया गुवाहाटी कोर्ट का फैसला
टूजी स्पेक्ट्रम मामले में सीबीआई जांच को बंद करने की मांग करते हुए बचाव पक्ष के वकीलों ने पटियाला हाउस स्थित सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी के समक्ष आईपैड पर गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को दिखाते हुए कहा कि अखबारों में भी यह खबर है।
उन्होंने कहा कि अगर इस फैसले के बाद भी सीबीआई गवाहों के बयान कराती है तो यह अदालत की अवमानना होगी। उसके बाद न्यायाधीश सैनी ने कहा कि उन्होंने भी अखबार पढ़े हैं, लेकिन मीडिया रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई बंद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि अगर कोई आधिकारिक आदेश आता है तो उस पर विचार करेंगे।