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वेव इंफ्राटेक भूमि आवंटन मामले में यूपी सरकार को नोटिस

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 15 Oct 2012 11:49 PM IST
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notice to the up government in land allotment for Wave Infratech

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नोएडा में वेव इंफ्राटेक भूमि आवंटन के खिलाफ और किसानों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को इन किसानों की याचिकाओं को पिछली याचिका से संबद्ध करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। प्रदेश सरकार ने इंफ्राटेक को 200 एकड़ जमीन का आवंटन फ्लैट बनाने के लिए किया है। इस भूमि का अधिग्रहण सरकार ने 1976 में आपात उपबंध का प्रयोग करके किया था।
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जस्टिस आरएम लोढ़ा व जस्टिस एआर दवे की पीठ के बाबूराम व राजपाल सहित अन्य किसानों के अधिवक्ता सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि नोएडा के विकास के लिए तीन दशक पहले अधिग्रहीत की गई भूमि का उपयोग कभी नहीं किया गया। जमीन को मुक्त करने के संबंध में किसानों की ओर से सभी संबंधित प्राधिकरणों से विस्तृत तौर पर सिफारिश की गई है लेकिन किसी ने भी जवाब नहीं दिया।


इसके बाद हाईकोर्ट से अधिग्रहण के संबंध में 1976 में जारी की गई अधिसूचनाओं को रद्द करने की मांग की गई। लेकिन हाईकोर्ट ने याचिकाएं देरी से दायर किए जाने के आधार पर खारिज कर दीं। इससे पहले पीठ ने 94 किसानों की ओर से दायर याचिका पर 24 सितंबर को प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था। किसानों ने प्रदेश सरकार पर अधिकार का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है क्योंकि करीब साढ़े तीन दशक पहले अधिग्रहीत की गई इस भूमि को निजी बिल्डर को सौंप दिया गया। यह जमीन निठारी गांव के करीब सेक्टर 25ए और सेक्टर 32 में स्थित है।

पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए इन याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करने का निर्णय लिया। अदालत ने पिछली याचिका को इन याचिकाओं के साथ संबद्ध कर दिया है। याचिका के मुताबिक वेव सिटी सेंटर प्रोजेक्ट नोएडा के महत्वपूर्ण क्षेत्र में 152 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित है।  

इसमें व्यवसायिक टॉवर, शॉपिंग मॉल, होटल और रिहायशी भवन बनने हैं। यह प्रोजेक्ट शराब व्यवसायी गुरुदीप सिंह (पौंटी) चड्ढा का है जिसे मायावती सरकार में अनुमति प्रदान की गई थी। माना जाता है कि चड्ढा मायावती बहुत करीबी थे। हालांकि अखिलेश यादव के नए निजाम में भी इस प्रोजेक्ट को गत माह मास्टर प्लान में मंजूरी दी गई।

गौरतलब है कि किसानों ने शीर्षस्थ अदालत से कहा है कि अधिग्रहण की अधिसूचना के 24 साल बाद किसानों को मुआवजा दिया गया। राज्य सरकार ने कौड़ियों के भाव में जमीन का अधिग्रहण किया। जबकि वेव इंफ्राटेक को यह जमीन 1.07 लाख रुपये प्रति स्क्वायर मीटर की कीमत पर दी गई है। इस जमीन का बाजार भाव 5.9 लाख रुपये प्रति स्क्वायर मीटर है।

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