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नाविकों को रिहा कराने के लिए केंद्र को नोटिस
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Jan 2013 11:40 PM IST
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सोमालियाई समुद्री डकैतों की ओर से बंधक बनाए गए 34 भारतीय नाविकों को रिहा कराने के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह, जहाजरानी और विदेश मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि भारत सरकार की ओर से बंधकों को छुड़ाने के लिए प्रयास न किए जाने के कारण नाविक लगभग दो साल से सोमालियाई डकैतों के कब्जे में हैं। यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया तो हो सकता है कि नाविकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़े।
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जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस दीपक मिश्र की पीठ ने तीनों मंत्रालयों से जवाब मांगा है। वकील गौरव कुमार बंसल ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि बंधक नाविकों के रिश्तेदार कई मंत्रालयों में ज्ञापन दे चुके हैं। यह लोग प्रधानमंत्री से इस दिशा में कदम उठाने का आग्रह कर चुके हैं।
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बंधक बनाए गए नाविकों का ब्योरा देते हुए याचिका में कहा गया है कि 29 मार्च, 2010 को पनामा का कार्गो शिप सोमालिया के डकैतों ने अपने कब्जे में ले लिया। संचालक दल के 24 सदस्यों में छह भारतीय हैं। इसी तरह 10 मई, 2012 को लाइबेरिया के टैंकर शिप पर कब्जा जमाकर डकैत उसे सोमालिया की सीमा में ले गए। इसमें 26 सदस्य थे। इनमें से 11 भारतीय हैं। इस साल मार्च में भी टैंकर शिप को जबरन सोमालिया ले जाया गया। इसमें 17 भारतीय नाविक हैं।
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याचिका के अनुसार बंधकों के रिश्तेदारों को मिली सूचना के अनुसार जहाज में पेयजल, खानपान के साथ-साथ ईंधन भी समाप्ति की ओर है। यदि भारत सरकार ने रिहाई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव नहीं बनाया तो डकैत बंधकों को एक-एक करके समुद्र में डुबो सकते हैं। बंधक बनाए गए नाविक छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल और पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। विदेश और जहाजरानी मंत्रालय को इस खतरे से आगाह करा दिया गया है। देश के अंदर व बाहर भारतीय नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा का दायित्व भारत सरकार का है। इसलिए अदालत से अनुरोध किया गया है कि वह सरकार के इस संबंध में उचित निर्देश जारी करे जिससे भारतीय नागरिकों को छुड़ाया जा सके।