मालेगांव ब्लास्ट मामला: केंद्र, महाराष्ट्र सरकार और एनआईए को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
क्या एनडीए सरकार ने मालेगांव ब्लास्ट मामले में विशेष अभियोजन अधिकारी को आरोपी के प्रति नरम रुख रखने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इसकी जांच शुरू कर दी है।
न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए) और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है। सभी को एक हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। अदालत ने हर्ष मंदर की याचिका पर इन सभी को नोटिस जारी किया है।
याचिका में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल देने की गुहार की गई है जिससे कि मालेगांव ब्लास्ट मामले का ट्रायल सही तरीके से हो। याचिका में अभियोजन अधिकारी रोहिणी सान्याल केउस दावे का हवाला दिया गया है जिसमें उन्होंने एनडीए सरकार पर आरोप लगाया था कि मामले के आरोपियों केप्रति नरम रुख अख्तियार करने का दबाव बनाया जा रहा है।
ब्लास्ट में हुई थी 4 की मौत
याचिकाकर्ता हर्ष मंदर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और इंदिरा जयसिंह ने पीठ से कहा कि इस मामले में आरोपियों को जमानत दी जा रही है, लिहाजा इस याचिका के निपटारे तक जमानत याचिकाओं पर सुनवाई पर रोक लगाई जाए। लेकिन अदालत ने उनके आग्रह को ठुकरा दिया।
29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए ब्लास्ट में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि 79 घायल हो गए थे। शुरुआत में इस मामले में एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया गया था लेकिन महाराष्ट्र एटीएस ने पाया कि ब्लास्ट केपीछे कथित तौर पर कुछ हिन्दूवादी संगठनों का हाथ है।
जिसके बाद 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल श्रीकांत पुरोहित भी शामिल हैं। 12 में से चार आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं।