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जालसाज शैलेंद्र के घर में थी नोट गिनने की मशीन

Fri, 10 Jul 2015 01:39 AM IST
Updated Fri, 10 Jul 2015 01:39 AM IST
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note counting machine in the house of Forger Shailendra.

जालसाजी में उस्तादों के उस्ताद निकले शैलेंद्र अग्रवाल ने धोखे दे देकर इतनी दौलत कमाई कि उसे नोट गिनने के लिए मशीन खरीदनी पड़ी।

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वह करोड़ों की काली कमाई में यह भी ध्यान रखता था कि कोई उसे नकली नोट न थमा जाए। उसके विभव नगर स्थित घर में मौजूद इस नोट गिनने की मशीन में ही नकली नोट पकड़ने का सिस्टम भी है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने छापे में इसे जब्त नहीं किया, जबकि चार्जशीट में इसकी जानकारी दी गई है।

उसके खिलाफ कायम हुए 32 केस में से सबसे पहला दर्ज कराने वाली श्वेता सिंह ने पुलिस को बताया कि वह जब 35 फीसदी सालाना ब्याज के लालच में आकर आलू में निवेश के लिए उसके विभव नगर स्थित घर पर पहुंची तो वहां नोट गिनने वाली मशीन लगी थी।
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शैलेंद्र ने दस लाख रुपये लेकर इसी मशीन से गिने। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह आलू में निवेश के नाम पर 10 लाख से कम नहीं लेता था। उसकी जालसाजी के जाल में अफसरों के अलावा पुलिसवाले भी खूब फंसे।
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कई बड़े पुलिस अधिकारी उसके झांसे में आए

note counting machine in the house of Forger Shailendra.

दरोगा और इंस्पेक्टर ही नहीं, डीआईजी तक उसके झांसे में आ गए। उसने किसी से भी दस लाख से कम नहीं लिए। कई ने तो आयकर के डर से रिपोर्ट ही दर्ज नहीं कराई। कई ने कराई तो रकम कम बताई। वह इस बात का भी ख्याल रखता था कि कोई उसे नकली नोट न दे जाए। इसलिए नोट गिनने के साथ ही मशीन से नकली नोट भी चेक करता था।

पुलिस ने जब उसके घर छापा मारा तो मोबाइल, लैपटॉप, हार्डडिस्क के अलावा नकली नोट की मशीन भी वहीं पर थी, लेकिन इसे जब्त नहीं किया गया। यह भी एक साक्ष्य हो सकता था।

कोर्ट तक नहीं पहुंची डायरी
जालसाज के कई राज उसकी डायरी में लिखे हैं। पुलिस ने यह उसके घर से बरामद की थी। इसमें अफसरों के साथ उसके लेनदेन का हिसाब भी है लेकिन इसे भी कोर्ट के सामने नहीं रखा गया है।

शर्मा-बनर्जी के बचाव में उतरी सरकार

note counting machine in the house of Forger Shailendra.

शैलेंद्र अग्रवाल जालसाजी प्रकरण में शक के दायरे में आए दो पूर्व डीजीपी एसी शर्मा और एएल बनर्जी के बचाव में सरकार ने उच्च न्यायालय में हलफनामा दिया है। इसमें कहा गया है कि दोनों पूर्व डीजीपी का एफआईआर में नाम ही नहीं है, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की कोई जरूरत नहीं।

यह हलफनामा आगरा के एसपी क्राइम प्रेमचंद की ओर से दाखिल किया गया है। प्रेमचंद भी इस केस की जांच के लिए गठित एसआईटी में शामिल हैं।

इस मामले की सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सेंटर फोर सिविल लिबर्टीज की अधिवक्ता डाक्टर नूतन ठाकुर की ओर से दायर जनहित याचिका पर हलफनामे के माध्यम से सरकार ने अपना पक्ष रखा है।

इसके बारे में नूतन ठाकुर ने ई-मेल के माध्यम से बताया कि हलफनामे में यह भी कहा गया है कि मीडिया में आई खबरों के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

'दोनों पूर्व डीजीपी का शैलेंद्र केस से वास्ता नहीं'

note counting machine in the house of Forger Shailendra.

बता दें कि सीबीआई की टेक्निकल विंग से डिकोड कराए गए एसएमएस की डिटेल लीक हो जाने पर यह खुलासा हुआ था कि शैलेंद्र अग्रवाल ने दो पूर्व डीजीपी के साथ मिलकर दरोगाओं की पोस्टिंग और प्रमोशन की बोली लगाई।

इसके बाद आईजी सिविल डिफेंस अमिताभ ठाकुर ने दावा किया था कि घूस का रेट फिक्स करने वाले तत्कालीन डीजीपी एसी शर्मा और एएल बनर्जी हैं। इसके बाद डाक्टर नूतन ठाकुर ने इस केस की सीबीआई जांच कराने के लिए पीआईएल दाखिल की थी।

जवाब दीजिए सरकार
- एसी शर्मा और एएल बनर्जी के डीजीपी रहते शैलेंद्र अग्रवाल को आठ-आठ गनर कैसे मिले हुए थे?
- सीबीआई की टेक्निकल विंग से डिकोड कराए गए शैलेंद्र के एसएमएस क्यों छुपाए जा रहे हैं?
- शैलेंद्र अग्रवाल के घर से मिली डायरी कोर्ट के सामने क्यों नहीं रखी गई?
- शक के घेरे में आए अफसरों की भूमिका की एसआईटी जांच अचानक क्यों बंद हो गई?
- अफसरों के बारे में जानकारी के लिए शैलेंद्र का रिमांड लेने से क्यों बच रही है पुलिस?

कोर्ट के सामने रखेंगे सच्चाई : नूतन
डाक्टर नूतन ठाकुर का कहना है कि  उनके पास कई तथ्य हैं, जिनसे साबित होता है कि इस केस से दोनों पूर्व डीजीपी का वास्ता है। उन्होंने कहा कि अभी तक प्राप्त विभिन्न तथ्यों को कोर्ट के सामने रखते हुए बताया जाएगा कि  कैसे इन अफसरों को बचाने का काम हो रहा है।

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