फिनायल नहीं, अब 'गोनाइल' के इस्तेमाल से होगी सफाई
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राजस्थान में अस्पतालों की सफाई फिनायल के बजाय अब गोमूत्र और अन्य गौ उत्पादों से बने गोनाइल से होगी।
यह गोनाइल आधुनिक तकनीक से रिफाइनरी में एक एंटीवायरल फिनायल की तरह तैयार किया जाएगा, जो अस्पताल के मरीजों और अन्य आगंतुकों को कई संक्रमण से बचाएगा।
गोनाइल राजस्थान के ही जालोर जिले में पथमेड़ा स्थित गोधाम (गौशाला) में स्थापित रिफाइनरी में तैयार किया जाएगा। रिफाइनरी इसी महीने गोनाइल का उत्पादन शुरू कर देगी।
चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ के मुताबिक इस गोनाइल से सबसे पहले सवाई मानसिंह अस्पताल की सफाई की योजना है।
चार करोड़ रुपये की रिफाइनरी
गौशाला के कार्यकारी अधिकारी एवं वैद्य श्याम सिंह राजपुरोहित का कहना है कि गोमूत्र में संक्रमण को खत्म करने वाले सभी तत्व मौजूद होते हैं। यह गोनाइल कंपनियों द्वारा तैयार किए जा रहे फिनायल के मुकाबले पूरी तरह से सुरक्षित है। ट्रस्ट की जल्द ही होने वाली बैठक के बाद गोनाइल की कीमत तय की जाएगी।
पथमेड़ा गोधाम में गोनाइल व गोमूत्र का अर्क बनाने के लिए चार करोड़ रुपये की रिफाइनरी स्थापित की गई है। इसमें रोजाना 7,000 लीटर गोमूत्र को रिफाइंड किया जाएगा, जिससे 3.5 हजार लीटर गोनाइल तैयार होगा।
गोमूत्र को एकत्र कर फिल्टर कर प्लांट में डाला जाएगा। स्वचालित प्लांट में गोमूत्र अर्क एवं एंटीवायरल फिनायल (गोनाइल) तैयार हो जाएगा। रिफाइनरी की क्षमता बढ़ाकर 10,000 लीटर करने का लक्ष्य है।