इस राजा ने शत्रु को सौंप दी थी पत्नी, देवर ने बचाई लाज
भारतीय इतिहास में कायर राजाओं का जिक्र किया जाए तो जेहन में सबसे पहला नाम जयचंद का उभरता है। लेकिन गुप्त राजा रामगुप्त ने शकों से हारने पर अपनी पत्नी तक शक राजा को सौंप दी थी। इतिहास की किताबों में रामगुप्त की कायरता और चंद्रगुप्त की इस वीरता के किस्से लिखे गए हैं।
जयचंद के बारे में बताया जाता है कि जब मुहम्मद गोरी पृथ्वीराज चौहान को बंदी बनाकर अफगानिस्तान ले गया था, तब जयचंद ने गोरी का साथ दिया था। गोरी ने चौहान को कड़ी यातनाएं देकर उनकी आंखे फोड़ दी थीं और वह उन्हें हर रोज दरबार में लाकर अपमानित करता था।
वहीं साल 1757 में हुए प्लासी के युद्ध के दौरान भी एक राजा की कायरता देखने को मिली। अंग्रेजों और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच हुए इस युद्ध में नवाब के सेनापति मीरजाफर ने अंग्रेजों से हाथ मिला लिया था और यही नवाब की हार की बड़ी वजह बना।
समुद्रगुप्त के बेटे ने अपनी पत्नी को दांव पर लगाया
गुप्त वंश के राजा समुद्रगुप्त का बेटा चंद्रगुप्त द्वितीय बेहद शौर्यवान और वीर था। उसने 375 ईसवी से लेकर 415 ईसवी तक करीब चालीस वर्ष शासन किया। हालांकि उसके शासन की शुरुआत भी उसके पिता की ही भांति रहस्यमय थी।
उस काल में लिखे गए एक नाटक चंद्रगुप्तम (समुद्रगुप्त की मौत पर होने वाली घटनाओं पर आधारित) बताता है कि समुद्र गु्प्त के बाद रामगुप्त सिंहासन पर बैठा।
रामगुप्त को शकों ने युद्ध में बुरी तरह पराजित कर दिया था। इस हार के एवज में वह अपनी पत्नी ध्रुवदेवी को शकों को समर्पित करने को भी तैयार हो गया था।
छोटे भाई ने बचाई अपनी भाभी की लाज
बड़े भाई की इस मजबूरी पर छोटे भाई चंद्रगुप्त को बहुत पीड़ा हुई और वह ध्रुवदेवी का वेश धारण करके शक राजा के कक्ष में पहुंच गया और वहां पहुंचकर उसने शक राजा की हत्या कर दी।
इस घटना से चंद्रगुप्त को जनता का तो स्नेह तो प्राप्त हुआ लेकिन उनकी उनके भाई से शुत्रुता हो गई। अंत में चंद्रगुप्त ने अपने भाई की हत्या कर ध्रुवदेवी से विवाह कर लिया। उस दौर के शिलालेखों से इस पूरी कहानी की पुष्टि होती है।