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नहीं पूछा जा सकता, नोटों पर गांधीजी की फोटो क्यों?

Fri, 18 Jan 2013 08:57 PM IST
फतेहगढ़ साहिब/राजेश भाटिया
फतेहगढ़ साहिब/राजेश भाटिया Updated Fri, 18 Jan 2013 08:57 PM IST
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not asked why mahatma gandhi photo on notes

नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर क्यों लगाई जाती है, यह सवाल नहीं पूछा जा सकता। एक आरटीआई पर भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यकारी निदेशक एस करुप्पासामी की ओर से यह जवाब दिया गया है।

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गांव तूरां के आरटीआई कार्यकर्ता गगनदीप ने केंद्र सरकार के गृह विभाग से सूचना मांगी थी नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर लगाने का फैसला कब और क्यों लिया गया। इसका जवाब उन्हें आरबीआई के कार्यकारी निदेशक की ओर से मिला कि सूचना अभिलाषी किसी भी सरकारी अधिकारी से क्यों और कैसे जैसे प्रश्न नहीं पूछ सकता।
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इससे पहले कब के जवाब में आरबीआई के सेंट्रल पब्लिक इन्फार्मेशन अफसर बीपी विजयंदर की ओर से बताया गया है कि आरबीआई अधिनियम 1934 की धारा 25 के तहत रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड ने 15 जुलाई 1993 को भारतीय नोटों के दायीं और वाटर मार्क के रूप में महात्मा गांधी की तस्वीर लगाने की प्रस्ताव पारित किया था।
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केंद्र सरकार ने 13 जुलाई 1994 को इस पर निर्णय लिया। गगनदीप इस अधूरे जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने फिर यह सूचना मांगते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की अपलेट अथॉरिटी के पास अपील की कि महात्मा गांधी की तस्वीर भारतीय करेंसी नोटो पर लगाने का फैसला क्यों लिया गया। इस संबंध में अपलेट अथॉरिटी ने मुंबई-पुणे हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया।


अपलेट अथॉरिटी एस करुप्पासामी ने अपील को रद्द करते हुए कहा, ‘आवेदनकर्ता सार्वजनिक अधिकारी से क्यों, कैसे आदि जैसे प्रश्न नहीं पूछ सकता। वह पब्लिक अधिकारी से विचार, व्याख्या, कारण व सफाई नहीं मांग सकता।

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