BSP, DMK, NC सहित 1652 पार्टियों का नहीं खुला खाता
लोकसभा चुनावों के दौरान लगभग 60 लाख लोगों ने ‘ऊपर में से कोई नहीं’ यानी नोटा का बटन दबाया है। यह देश की 21 पार्टियों को मिले वोट से अधिक है। पहली बार इसी लोक सभा चुनाव में नोटा का विकल्प उपलब्ध कराया गया है।
अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हुए देश के 59,97,054 वोटरों ने नोटा का विकल्प आजमाया। उन्होंने वोटिंग मशीन में नोटा का बटन दबाया। यह देश की 543 सीटों पर डाले गए वोटों के 1.1 फीसदी के बराबर है।
कुल वोटों में इसकी तीन फीसदी हिस्सेदारी
यह जनता दल (यूनाइटेड), भाकपा और शिरोमणि अकाली दल समेत देश की 23 पार्टियों की ओर से हासिल वोटों से भी ज्यादा है। सबसे ज्यादा नोटा का बटन पुडुचेरी लोकसभा सीट के मतदाताओं ने दबाया।
यहां पड़े कुल वोटों में इसकी तीन फीसदी हिस्सेदारी थी।
नोटा के तहत .यहां 22,268 वोट पड़े। इसके बाद नोटा का विकल्प आजमाने वाले राज्यों में मेघालय (2.8 फीसदी), गुजरात (1.8 फीसदी), छत्तीसगढ़ (1.8) और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली (1.8 फीसदी ) का नंबर है।
सबसे खराब रहा प्रदर्शन
16वीं लोकसभा के चुनाव में बसपा, डीएमके और नेशनल कांफ्रेंस सहित 1652 पार्टियों का खाता नहीं खुला।
देश में अभी 1687 पंजीकृत राजनीतिक दल हैं, जिसमें से 35 राजनीतिक दलों के 540 से अधिक उम्मीदवार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। इस बार कई स्थापित क्षेत्रीय दलों का सफाया हो गया है।
राज ठाकरे भी रहे शून्य पर
इसमें राज ठाकरे की मनसे, लोकदल, असम गण परिषद जैसी पार्टियां भी शामिल हैं। वोट प्रतिशत के मामले में तीसरे स्थान पर रहने वाली बसपा का इस चुनाव में खाता नहीं खुलना आश्चर्य पैदा करता है।
पार्टी को 2.3 करोड़ वोट मिले हैं। उसके उम्मीदवार 34 सीटों पर दूसरे स्थान पर रहे हैं।