फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   nosogenic accident in lucknow

चमत्कारः आर-पार हुआ सरिया, मिली नई जिंदगी

Mon, 14 Apr 2014 02:23 PM IST
Updated Mon, 14 Apr 2014 02:23 PM IST
विज्ञापन
nosogenic accident in lucknow

समय पर सटीक फैसला लेकर लखनऊ के केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने एक युवक के शरीर के आर-पार हो गए सरिये को निकाल उसे नया जीवन दिया। हादसे में उसकी छोटी व बड़ी आंत क्षतिग्रस्त हो गई थी।

विज्ञापन


तीन घंटे चले ऑपरेशन में डॉक्टरों ने सरिया निकालने के साथ ही उसकी छोटी व बड़ी आंत को सही किया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। ऑपरेशन कितना जटिल था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तीन घंटे तक चली सर्जरी के दौरान डॉक्टरों की पूरी टीम की सांसें भी अटकी हुई थीं।

विज्ञापन

कैसे हुआ हादसा

nosogenic accident in lucknow

अमेठी के जायस में पेट्रोलियम प्लांट में मजदूरी करने वाला अनिल पैर फिसलने से पांचवीं मंजिल से गिर गया। वह निर्माण कार्य के लिए रखे करीब 16 एमएम व्यास वाले सरिये पर जा गिरा।

सरिया उसके पेट के निचले हिस्से से घुसता हुआ पीठ की तरफ से आर-पार हो गया। किसी तरह से साथियों ने सरिया काटा और अनिल को रायबरेली जिला अस्पताल पहुंचाया जहां से उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।

अनिल शुक्रवार दोपहर करीब 3.45 बजे हादसे का शिकार हुआ। सरिया काटने, जिला अस्पताल ले जाने और फिर ट्रॉमा सेंटर पहुंचने तक रात के 8:30 बज चुके थे। यानी पौने पांच घंटे की देरी से उसे यहां लाया गया। ऐसे में खून बहुत बह चुका था।

बड़ी समस्या यह भी थी कि अनिल को ऑपरेशन टेबल पर पूरी तरह से लिटाया नहीं जा सकता था जिससे उसे बेहोश करने में दिक्कतें आ रही थीं। पेट से होते हुए सरिया ऐसे पीठ से बाहर हुआ था कि उसे करवट लिटाकर ही ऑपरेशन किया जा सकता था।

सर‌िया न‌िकालना था बड़ी चुनौती

nosogenic accident in lucknow

सबसे बड़ी चुनौती अंगों को कम से कम नुकसान के साथ सरिया बाहर निकालने की थी। सरिये की घुमावटें इसमें बड़ी समस्या थीं। यानी जैसे किसी स्क्रू को खोला जाता है वैसे ही सरिये को निकाला जा सकता था।

डॉक्टरों ने इसके लिए लगभग 10 इंच का चीरा लगाया जिससे पता चल सके कि अंदर चोट कितनी है। किन अंगों को नुकसान पहुंचा। जब सारी स्थिति साफ हुई तो सरिये को घुमा-घुमाकर बाहर निकाला

विज्ञापन

खून का रिसाव रोकना हो रहा था मुश्क‌िल

nosogenic accident in lucknow

सरिया आर-पार होने से घायल मजदूर अनिल को लाने में भले ही देरी हुई हो पर डॉक्टरों की टीम ने ट्रॉमा सेंटर पहुंचते ही केस को एक चुनौती की तरह लिया।

डॉ. विनोद जैन और डॉ. समीर मिश्रा की टीम ऑपरेशन की तैयारियां शुरू करने के साथ ही आने वाली चुनौतियों का पता लगाने में जुट गई। महज आधे घंटे में ऑपरेशन की सारी व्यवस्थाएं हो गईं।

आर-पार सरिया को निकालने के साथ ही डॉक्टरों से सामने सबसे बड़ी चुनौती खून के रिसाव को लेकर थी। क्षतिग्रस्त छोटी और बड़ी आंत के साथ ही कूल्हे की हड्डी के ऊपरी हिस्से में फ्रैक्चर के साथ खून का रिसाव हो रहा था।

आंतों को सही करने के साथ ही खून का रिसाव रोका गया। कूल्हे की हड्डी के फ्रैक्चर को लेकर टीम इस नतीजे पर पहुंची की यहां हो रहे खून के रिसाव को बंद कर फ्रैक्चर को छोड़ दिया जाए। क्योंकि फ्रैक्चर अपने आप ठीक हो जाएगा।

इन्होंने दिया जीवन

nosogenic accident in lucknow

एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनोद जैन, डॉ. समीर मिश्रा, चीफ रेजीडेंट डॉ. वैभव जायसवाल, डॉ. अमित श्रीवास्तव, डॉ. अशोक कुमार, एनेस्थेटिस्ट डॉ. जिया

केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के सह प्रभारी और सर्जरी विभाग के डॉ. विनोद जैन ने बताया कि 24 घंटे बाद वह पूरी तरह स्वस्थ है। वह ठीक तरीके से बातचीत कर रहा है।

चूंकि अनिल को ऑपरेशन टेबल पर नहीं लिटाया जा सकता था ऐसे में पहली चुनौती उसे बेहोश करने की ही थी। डॉक्टरों ने तुरंत तरकीब निकाली। तीन लोगों ने उसे हवा में ही सपोर्ट किया और बेहोशी के बाद ऑपरेशन शुरू कर दिया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed