विदेश में बसने की चाह डिप्रेशन में डाल रही उत्तर भारतीयों को

आशीष तिवारी/चंडीगढ़ Updated Sun, 07 Oct 2012 01:24 AM IST
north indians settling abroad seeking to put in depression
महत्वाकांक्षी होना अच्छा है, लेकिन अति-महत्वाकांक्षी होकर विफल होना सेहत के लिए अच्छा नहीं है। उत्तर भारत के लोगों को यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए क्योंकि महत्वाकांक्षाएं उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। यह कहना है चंडीगढ़ में चल रही एनुअल नेशनल कांफ्रेंस ऑफ प्राइवेट साइकेट्री में शिरकत करने पहुंचे विशेषज्ञों का।

विशेषज्ञों ने उत्तर भारत में डिप्रेशन (अवसाद) के बदलते ट्रेंड पर कांफ्रेंस में बताया कि विदेश जाने की महत्वाकांक्षा यहां नए शिखर छू रही है। इसके नकारात्मक परिणाम भी आ रहे हैं। पटियाला के राजेंद्र मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर कुलदीप शर्मा कहते हैं कि उनकी ओपीडी में हर सप्ताह ऐसे औसतन पांच मरीज आते हैं जो लंबे समय से विदेश जाने की चाह रखते हैं लेकिन कुछ कारणों से नहीं जा पाते।

इसके अलावा ऐसे लोग भी आते हैं जो अपने बच्चों को तमाम दिक्कतों के बाद विदेश तो भेज देते हैं लेकिन बच्चे वहां परेशान हैं। ऐसे में माता-पिता यहां डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। जीएमसीएच के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो. बीएस चवन कहते हैं कि उनकी ओपीडी में भी ऐसे मरीज इलाज कराने आते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में ऐसे डिप्रेशन के शिकार जान तक दे देते हैं। आयोजन समिति के सदस्य डॉ. प्रमोद कहते हैं कि उनकी एसोसिएशन द्वारा हुई स्टडी से पता चलता है कि समूचे उत्तर भारत में औसतन 70 फीसदी लोग तनाव के चलते डिप्रेशन में आ जाते हैं।

वह कहते हैं, लोगों में डिप्रेशन का प्रमुख कारण अति महत्वाकांक्षा है। हालांकि महत्वाकांक्षी होना गलत नहीं है लेकिन हद से ज्यादा उम्मीदें पालना न सिर्फ ऐसे लोगों को भारी पड़ रही हैं बल्कि उनके परिजन भी इसके शिकार हो रहे हैं।

अतिमहत्वाकांक्षा से तनाव कैसे
- बगैर योजना बनाए अधिक पैसा पैदा करने की योजना में हाथ डालना।
- आय से अधिक खर्च करना।
- लोगों या बैंक कर्ज लेना और न चुका पाना।
- बच्चों को अपने मन के विषय पढ़ने का दबाव डालना।
- विदेश में बसने की जिद करना और कामयाब न होना।
- परिजनों का बच्चों के दबाव में आना और सब कुछ दांव पर लगा देना।

ऐसे बचें
- जोखिम सोच समझ कर उठाएं।
- बिना सोचे-समझे किसी के कहने पर कोई काम न करे।
- जो कुछ करें योजनाबद्ध तरीके से करें।
- कर्ज उतना ही लें जितना चुकाने की क्षमता हो।
- आय से अधिक कभी खर्च न करें।

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