ऐसे बनेंगे नोएडा और ग्रेटर नोएडा स्मार्ट सिटी
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नोएडा और ग्रेटर नोएडा को स्मार्ट सिटी बनाने की तरफ कदम बढ़ने लगे हैं। दोनों शहरों में कचरा प्रबंधन की बड़ी चुनौती से निपटने की योजना बनाई गई है। ग्रेनो के अस्तौली गांव में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाया जाएगा। नोएडा के कचरे को भी इसी प्लांट में ठिकाने लगाया जाएगा।
इसकी संशोधित संयुक्त डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को प्राधिकरण ने मंजूरी दे दी है। ग्रेनो में प्लांट लगाने की मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी, लेकिन नोएडा से रोजाना निकलने वाले करीब 450 टन कचरे को ठिकाने लगाने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं हो पाया था।पर्यावरण के लिहाज से नोएडा में प्लांट लगाने की मंजूरी नहीं मिल पाई थी।
इसके बाद ग्रेनो में ही नोएडा का कचरा खपाने की योजना बनाई गई। इसे ध्यान में रखकर अस्तौली में प्रस्तावित प्लांट की डीपीआर में संशोधन करना पड़ा है। नोएडा व ग्रेनो प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण ने संयुक्त डीपीआर को मंजूरी दे दी है।
प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 100 करोड़
जिसे पर्यावरणीय मंजूरी के लिए राज्य स्तरीय कमेटी के पास भेज दिया गया है। ग्रेनो का अस्तौली गांव बी श्रेणी के तहत आता है, इसलिए केंद्र स्तर से पर्यावरणीय मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी।
प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि अस्तौली में 125 एकड़ जमीन पर प्लांट लगाया जाएगा। अगस्त में इसका काम शुरू करने की योजना है। दो तरह के लगेंगे प्लांट अस्तौली में दो तरह के प्लांट लगाए जाएंगे। 350 टन क्षमता का कंपोज्ड प्लांट लगेगा। इसमें ऐसे कचरे का निस्तारण होगा जिससे खाद्य बन सके।
150 टन क्षमता का आरडीएफ (रिफ्यूज्ड ड्राइव्ड फ्यूल) प्लांट लगाया जाएगा। इससे निकलने वाले कचरे का इस्तेमाल फ्यूल के रूप में हो सकेगा। इसका इस्तेमाल बाद में बिजली बनाने के प्लांट में किया जाएगा।
अभी नहीं बन पाएगी कचरे से बिजली
नोएडा और ग्रेटर नोएडा से निकलने वाला सैकड़ों टन कचरा दोनों शहरों के लिए चुनौती बन गया है। आला अधिकारी इस चुनौती को लेकर गंभीर हैं, लेकिन लैंडफिल साइट योजना पर ग्रेनो प्राधिकरण की सुस्ती भारी पड़ रही है।
मसलन, अस्तौली में जहां लैंडफिल साइट बनाई जानी है, उस जमीन का अधिग्रहण अब तक नहीं किया जा सका है। जबकि दो महीने बाद इस योजना पर काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है। दोनों शहरों के कचरे से बिजली बनाने की योजना परवान चढ़ेगी, लेकिन फिलहाल डीपीआर में इसका प्रावधान नहीं किया गया है।
अधिकारियों की मानें तो प्लांट की परफॉरमेंस के आधार पर यह निर्णय लिया जाएगा। भविष्य में दो चरण में पांच-पांच मेगावाट का प्लांट लगाया जाएगा।