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'अरुणाचल पर कब्जे के लिए चीन बढ़ा रहा सैन्य शक्ति'

Sun, 30 Nov 2014 01:31 PM IST
एजेंसी/बंगलूरू
एजेंसी/बंगलूरू Updated Sun, 30 Nov 2014 01:31 PM IST
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no peace with developed china.

वायुसेना प्रमुख अरूप राहा ने शनिवार को कहा कि भारत की सीमा विस्तार की कोई महत्वाकांक्षा नहीं है, लेकिन पड़ोसियों के कब्जे वाली अपनी जमीन हम वापस चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस बात पर संदेह है कि चीन की बढ़ती ताकत शांति बनाए रखेगी या नहीं। लिहाजा भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमारे पास तैयार रहने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है।

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बंगलूरू में एयर चीफ मार्शल एलएम कात्रे मेमोरियल लेक्चर में अपना वक्तव्य रखते हुए उन्होंने कहा कि हमारी सीमाएं शत्रुओं से घिरी हैं, ब्रिटिश लंबे समय तक राज कर चुके हैं और हम अतीत में संघर्ष करते आए हैं। हम सुरक्षा की दृष्टि से कमजोर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास युद्ध छेड़ने की नहीं रोकने की क्षमता होनी चाहिए क्योंकि हमारा उद्देश्य संघर्ष को टालना है, लेकिन हमारे खिलाफ युद्ध छेड़ने वालों को हम रोक सकें इसके लिए तैयार रहना होगा। इसमें वायुसेना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हमारी क्षमता क्या होनी चाहिए? इस संबंध में राहा ने कहा कि हमारे पास शत्रु के घर में घुस कर मारने की क्षमता होनी चाहिए और ऐसा करने में वायुसेना सहायक बन सकती है। इसके लिए वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ानी होगी। वायुसेना के समक्ष चुनौतियों पर उन्होंने कहा कि बजट इसमें बड़ा बाधक है। हथियार, उपकरण प्रणाली आदि खरीदने के लिए पैसे नहीं है। उससे भी ज्यादा चुनौती उपकरणों के रख रखाव के लिए बजट और सामानों की खरीद का है। हम मल्टी-स्पेक्ट्रम स्ट्रेटजिक फोर्स बनने की कोशिश कर रहे हैं और एकीकृत की लंबी योजना है जो कि 2027 में पूरी होगी।
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चीन की ‘दबंगई’ से मुश्किल में शांति का सपना

no peace with developed china.

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि मौजूदा समय में सामरिक गुरुत्वाकर्षण पश्चिम से पूर्व की ओर स्थानांतरित हुआ है। यह एशिया व एशिया-पैसिफिक की ओर ज्यादा स्थानांतरित हुआ है जहां सुरक्षा को लेकर व्यापक चुनौतियां हैं। इसमें सबसे आगे है ‘दबंगई’ दिखाता चीन, क्योंकि चीन आर्थिक तौर पर विकसित हो रहा है और वह अपनी सैन्य शक्ति खासकर वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भारी खर्च करने में सक्षम है।

चीन दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय जल, द्वीप और वायु क्षेत्र में नए-नए दावे कर रहा है। इससे पड़ोसी देशों के तटों पर संघर्ष बढ़ गया है। लेह-लद्दाख सेक्टर, अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर घुसपैठ के रूप में हमें इन समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इस माहौल में हालात बेहतर दिखाई नहीं दे रहे हैं और जो हो रहा है वही होता रहा तो विकसित चीन के साथ शांति दूर का सपना रह जाएगा।

उन्होंने हांगकांग के सुरक्षा विश्लेषक के एक लेख का हवाला देते हुए कहा कि चीन अगले 30-35 साल में ताइवान, अरुणाचल प्रदेश, जापान, रूस और मंगोलिया से संघर्ष को ध्यान में रख कर अपनी सैन्य शक्ति का विकास कर रहा है।

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