फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   no new professor in japanies and chinese language.

चीनी-जापानी सीख नौकरी पाने का टूट रहा सपना

Thu, 04 Sep 2014 12:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 04 Sep 2014 12:43 PM IST
विज्ञापन
no new professor in japanies and chinese language.

तकनीकी युग में विदेशी भाषा जानने वाले युवाओं के लिए जहां नौकरी और स्वरोजगार की संभावनाएं दिनोंदिन बढ़ रही हैं, वहीं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में चीनी और जापानी भाषा की पढ़ाई शिक्षक न होने के चलते पिछले चार साल से बंद है।

विज्ञापन


इस कारण इन भाषाओं को सीखकर रोजगार पाने का युवाओं का सपना टूट रहा है।

संपूर्णानंद में परंपरागत पाठ्यक्रमों के साथ ही कुछ विदेशी भाषाओं की भी पढ़ाई होती है। इनमें फ्रेंच, जर्मन, रूसी, तिब्बती, नेपाली और फारसी भाषा की कक्षाएं तो चल रही हैं लेकिन जापानी और चीनी के लिए शिक्षक ही नहीं हैं।
विज्ञापन


वर्ष 1977 में चीनी और 1990 में जापानी की पढ़ाई शुरू हुई थी। दो साल के डिप्लोमा और तीन साल के एडवांस डिप्लोमा कोर्स में दाखिला के लिए अर्हता इंटरमीडिएट थी। दोनों में 50-50 सीटें निर्धारित थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

शिक्षक नियुक्त नहीं होने से आ रही दिक्कत

no new professor in japanies and chinese language.

वर्ष 2010 में जापानी में 17 और चीनी में 15 से अधिक विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था, जो अंतिम बैच था। जापानी विषय में बतौर अतिथि शिक्षक आशोगोतो पढ़ा रहे थे लेकिन समय से मानदेय न मिलने के कारण उन्होंने किनारा कर लिया।

चीनी भाषा के शिक्षक ने भी मानदेय न मिलने पर छोड़ दिया। चार साल हो गए लेकिन अभी तक विश्वविद्यालय को दोनों भाषाओं के शिक्षक नहीं मिल सके।

आधुनिक भाषा एवं भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि जापानी और चीनी भाषा की पढ़ाई के लिए यूजीसी से शिक्षकों का कोई पद स्वीकृत नहीं है। चार साल पहले तक अतिथि शिक्षकों की मदद से ये पाठ्यक्रम संचालित हो रहे थे। जल्द ही कुलपति को पत्र भेजकर शिक्षकों की नियुक्ति करने का अनुरोध किया जाएगा, ताकि फिर से दोनों में कक्षाएं शुरू की जा सकें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed