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...तो सरकारी तोता बनी रहेगी सीबीआई
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Mon, 03 Jun 2013 12:22 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद सीबीआई के राजनीतिक आकाओं के चंगुल से मुक्त होने की उम्मीद कम ही है। जांच एजेंसी को स्वायत्त बनाने के लिए गठित जीओएम ही उसे सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।
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माना जा रहा है कि जीओएम में बनी राय के बाद सरकार सीबीआई पर कोई नया बिल नहीं लाएगी, बल्कि इससे संबंधित कानून में ही कुछ प्रावधान बदल सकती है।
इससे माना जा रहा है कि सीबीआई सरकारी तोता बनी रहेगा। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई पिंजड़े में बंद तोता है, वह अपने राजनीतिक आकाओं की भाषा बोलती है।
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सूत्रों के मुताबिक जीओएम की अब तक दो बैठकें हुई हैं, जिनमें सीबीआई को सरकारी चंगुल से मुक्त करने पर कोई खास दिलचस्पी सामने नहीं आई है।
अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती से कहा गया है कि वह सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने के लिए हलफनामा तैयार करें, जिसमें दिल्ली स्पेशल पुलिस स्थापना (डीपीएसई) कानून में किए जाने वाले बदलाव का ब्योरा होगा।
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सीबीआई इसी कानून के दायरे में आती है। मौजूदा प्रावधान के तहत सीबीआई केवल उन्हीं मामलों की जांच कर सकती है, जिन्हें केंद्र सरकार अधिसूचित करती है।
लेकिन प्रस्तावित बदलाव के तहत एजेंसी राज्यों के मामलों की भी जांच कर सकेगी और उसे राज्य सरकारों से इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी।
डीपीएसई एक्ट में सीबीआई के लिए दिशानिर्देश, इसके निदेशक की चयन प्रक्रिया, संगठन संरचना, जांच एजेंसी की शक्तियां और इसके दायरे, इसके अधिकारियों की शक्तियों को परिभाषित किया गया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार इनमें से किसी भी प्रावधान में कोई बदलाव करने के पक्ष में नहीं है।
इसके बजाय जीओएम सीबीआई प्रमुख को ज्यादा वित्तीय अधिकार देकर एजेंसी को स्वायत्त बनाने की खानापूर्ति करने के पक्ष में है। फिलहाल मामूली खर्च के लिए कार्मिक मंत्रालय से अनुमति लेनी होती है।
सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता वाले जीओएम की पिछली बैठक में सदस्यों का कहना है कि न्यायपालिका विधायिका को नहीं बता सकती कि सीबीआई को कैसे काम करे और कैसे नहीं। इसलिए डीपीएसई एक्ट में मामूली बदलाव पर्याप्त हैं।
सूत्रों ने बताया कि जीओएम अपने निष्कर्षों पर पहुंचने पर कानून में किए जाने बदलावों का मसौदा तैयार करेगा, जिसे 10 जुलाई को होने वाली सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाना है।