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रेप पीड़िता का बयान विश्वसनीय हो, तो न करें पुष्टि

Sat, 19 Sep 2015 01:49 AM IST
Updated Sat, 19 Sep 2015 01:49 AM IST
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No need for further verification if rape victims looks true

दुष्कर्म पीड़िता का बयान अगर भरोसे के लायक और विश्वसनीय हो, तो आगे इसकी पुष्टि जरूरी नहीं। बांबे हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक दुष्कर्म के मामले में सेशन कोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए की।

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बांबे हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश वीके तहिलरमानी और न्यायाधीश एएस गडकरी की खंडपीठ ने 16 सितंबर को यह टिप्पणी की।

अदालत ने सेशन जज द्वारा सांगली के 23 वर्षीय पांडुरंग लालासाहेब यादव को अपने ही गांव की एक 10 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में सुनाई गई 10 साल की सजा को सही ठहराया।
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मेडिकल से रेप की पुष्टि

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सजा को सही करार देते हुए अदालत ने कहा, ‘पीड़िता द्वारा मामले में दी गई गवाही विश्वसनीय है। ऐसे में इसके समर्थन के लिए कोरोबोरेशन एविडेंस की जरूरत नहीं। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता की मां की गवाही दोषी पर लगे आरोपों को पुष्ट करती है।

कोरोबोरेशन किसी मामले में दिए गए शुरुआती सबूतों को पुष्ट करने के लिए दिए जाने वाले सबूत हैं।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक यादव 23 दिसंबर, 2006 को स्कूल से घर आ रही पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया।

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