UPPSC का एक और विवादित फैसला, क्या होगा परिणाम?
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के एक और फैसले को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। साथ में अफसरों की मंशा पर भी सवाल उठने लगे हैं। आयोग की बैठक में हुए निर्णय के अनुसार अंतिम परिणाम में भी अब परीक्षार्थियों का नाम घोषित नहीं किया जाएगा। सिर्फ रोल और रजिस्ट्रेशन नंबर होगा।
इतना ही नहीं अंकपत्र पर भी नाम दर्ज नहीं होगा। आयोग के इस फैसले के खिलाफ नया विवाद खड़ा हो गया है। आयोग की भर्तियों में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के परिणाम में तो सिर्फ रोल नंबर दर्ज होता है लेकिन अंतिम परिणाम में चयनित अभ्यर्थियों के नाम घोषित किए जाते हैं।
पीसीएस, लोअर सबऑर्डिनेट, समीक्षा अधिकारी-सहायेक समीक्षा अधिकारी जैसी बड़ी भर्तियों समेत सभी परीक्षाओं के रिजल्ट में इसका पालन किया जाता है। अभ्यर्थियों की मार्कशीट पर तो सफल और असफल सभी अभ्यर्थियों के नाम होते हैं लेकिन आयोग के नए फैसले के तहत चयनितों के नाम भी अब गोपनीय रहेंगे।
आयोग की 22 अप्रैल को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इसके अनुसार सिर्फ अनुक्रमांक और रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर रिजल्ट घोषित किए जाएंगे। इसके अनुपालन के लिए सभी संबंधित अनुभागों को लिखा गया है।
अंतिम परिणाम में सिर्फ होगा रोल और रजिस्ट्रेशन नंबर
आयोग में इससे पहले अक्तूबर 2013 में भी निर्णय लिया गया था कि अभ्यर्थियों के नाम के आगे जाति नहीं लिखी जाएगी। इसे लेकर भी काफी विवाद हुआ था। कई प्रतियोगियों के खिलाफ एफआईआर भी लिखाई गई थी।
डॉ.अनिल यादव के अध्यक्ष बनने के बाद आयोग की भर्तियों में किसी खास जाति के अभ्यर्थियों की सफलता का ग्राफ अचानक बढ़ने का आरोप लगता रहा है। इसके खिलाफ प्रतियोगी आंदोलनरत हैं। इन आरोपों के बीच आयोग ने मार्कशीट देखने की प्रक्रिया काफी जटिल कर दी है।
इसके अलावा भी कई कदम उठाए गए हैं जिससे कि कोई दूसरा मार्कशीट न देख सके। ऐसे में अब अंतिम परिणाम में नाम घोषित करने के फैसले के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।
धांधली का आरोप, राज्यपाल से करेंगे शिकायत
केवल रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर रिजल्ट घोषित करने के आयोग के निर्णय के खिलाफ प्रतियोगी एक बार फिर आंदोलन की तैयारी में हैं। उनका आरोप है कि धांधली छिपाने के लिए आयोग में एक के बाद एक विवादित निर्णय लिए जा रहे हैं।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में प्रतियोगियों का कहना था कि आने वाले दिनों में कई रिजल्ट घोषित होने हैं। उनका कहना था कि डॉ.अनिल यादव के अध्यक्ष बनने के बाद एक खास जाति के लोगों के सफल होने की संख्या अचानक काफी बढ़ गई है।
अवनीश पांडेय, अयोध्या सिंह आदि ने आरोप लगाया कि यह निर्णय इस तरह की गड़बड़ियों को छिपाने के लिए लिया गया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि इसके खिलाफ वे आंदोलन चलाने के साथ राज्यपाल से भी शिकायत करेंगे।