'यहां कोई अल्पसंख्यक नहीं, सबका डीएनए एक'
(तस्वीरः आरएसएस की प्रतिनिधि सभा में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ बैठे भैयाजी जोशी)
'भारत में जहां सभी लोग सांस्कृतिक रूप से, राष्ट्रीयता के तौर पर और डीएनए के लिहाज से हिंदू हैं, ऐसे में यहां कोई अल्पसंख्यक नहीं है।' ये कहना राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ नेता दत्तात्रेय होसबले का।
आरएसएस के मुख्यालय नागपुर में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए होसबले ने कहा' आप अल्पसंख्यक किसे कहते हैं? हम किसी को अल्पसंख्यक नहीं मानते। देश में अल्पसंख्यक नाम की कोई अवधारणा नहीं होनी चाहिए क्योंकि यहां कोई अल्पसंख्यक नहीं है।'
उन्होंने कहा कि मोहन भागवतजी इस बात को 20 बार कह चुके हैं कि जो भारत में पैदा हुआ है वह हिंदू है। कोई इसे स्वीकार करे या नहीं। लेकिन देश सभी नागरिक संस्कृति, राष्ट्रीयता और डीएनए में एक ही हैं।
मीडिया ने इस पर सवाल किया कि क्या संघ अपनी शाखाओं में धार्मिक अल्पसंख्यकों और महिलाओं के लिए भी दरवाजे खोलेगा?
मीडिया के सवाल पर क्या बोले होसबले?
धार्मिक अल्पसंख्यकों को शाखाओं में बुलाने के सवाल पर संघ के संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि संघ की शाखाओं में तथाकथित अल्पसंख्यक जिन्हें मीडिया अल्पसंख्यक कहती है वे पहले से ही शाखाओं में मौजूद हैं। वे लोग हमारे कार्यकर्ता हैं।
महिलाओं की अगर बात है तो संघ में राष्ट्र सेविका समिति है और वे सक्रिय रूप से संघ के क्रियाकलापों में हिस्सा लेती है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की शाखाओं में जरूरत नहीं है लेकिन बाकी जगहों में उनकी भागीदारी जरूरी है। संघ में मौजूद महिलाएं सभी सेवा कार्यों में भाग लेती और कुछ ने तो अपना जीवन ही सेवा के लिए समर्पित किया हुआ है।