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कूड़े में फेंक दूंगा भाजपा का नोटिस: जेठमलानी
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 28 Nov 2012 08:12 AM IST
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अपने निलंबन और कारण बताओ नोटिस को नजरअंदाज करने वाले राज्यसभा सांसद राम जेठमलानी के बागी तेवरों में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने ताल ठोकते हुए कहा कि उन्हें पार्टी का कारण बताओ नोटिस नहीं मिला है। नोटिस मिलने के बाद उसे पढ़ेंगे और कुछ तथ्य दिखे तो ही जवाब देंगे, अन्यथा कूड़े के ढेर में फेंक देंगे।
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जेठमलानी ने गडकरी को लिखे पत्र में अपने निलंबन आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संसदीय बोर्ड के अधिकार क्षेत्र को अपने हाथ में लेने वाला है। ऐसी कोई स्थिति नहीं आई थी कि मुझसे बात किए बिना आगे बढ़ते। उन्होंने कहा कि कम से कम सामान्य शिष्टाचार का पालन किया जा सकता था।
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निलंबित भाजपा सांसद के निशाने पर खासतौर पर अरुण जेटली रहे। उन्होंने गडकरी पर आरोप लगाया कि वे जेटली की सलाह पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें निलंबन से कोई असर नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि वे कानूनी क्षेत्र व राजनीतिक क्षेत्र में लोगों के प्यार व सम्मान के कारण हैं। वे राज्यसभा के मोहताज भी नहीं हैं।
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खुद को भाजपा के संस्थापकों में से एक बताते हुए जेठमलानी ने पत्र में कहा कि गडकरी पार्टी को बर्बादी के रास्ते पर ले जा रहे हैं। उन्होंने पुरानी कहावत विनाश काले, विपरीत बुद्धि का जिक्र कर कहा कि गडकरी उनके प्रति पहले से दुर्भावना से प्रेरित हैं।
जेठमलानी ने इस बात पर हैरानी जताई कि सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा के प्रतिद्वंद्वी का मामला भाजपा नेताओं को मालूम नहीं है। दरअसल, सिन्हा के प्रतिद्वंद्वी का मामला देखने वाले वकील कभी जेटली के जूनियर रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के वरिष्ठ सदस्य और पार्टी के संस्थापक होने के बावजूद सुषमा व जेटली ने उनसे लोकपाल को लेकर चर्चा तक नहीं की।
आखिर क्या है जेठमलानी का चक्कर
राम जेठमलानी को पार्टी से बाहर करने की जगह कारण बताओ नोटिस से भाजपा समर्थकों को अचरज है, खासकर जब गडकरी ने निलंबन का आदेश दे दिया था और संसदीय बोर्ड निष्कासन के लिए बैठा था। कुल मिलाकर भाजपा नेताओं को पता है कि जेठमलानी कानूनी मामले में बड़े उस्ताद हैं। ऐसे में यदि उन्हें सीधे निकाल दिया गया तो वह अपने निष्कासन पर पार्टी को अदालत में घसीट सकते हैं इस आधार पर कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। अब अदालत के पचड़े में कौन पड़े।