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आपराधिक मामलों में बरी होने पर भी पुलिस में नौकरी नहीं

Tue, 02 Dec 2014 05:24 PM IST
Updated Tue, 02 Dec 2014 05:24 PM IST
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No job in police force even if you are exonerated in criminal case

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक चौकाने वाला फैसला दिया है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक इस नए फैसले के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति पर आपराधिक मामला दर्ज होता है तो उसे किसी भी सूरत में पुलिस में नौकरी नहीं मिलेगी। भले ही वह व्यक्ति कानून के समक्ष बाद में ऐसे किसी मामले में बरी ही क्यों न कर दिया गया हो।

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जस्टिस टी एस ठाकुर और आदर्श कुमार गोयल की बेंच ने अपने ताजा फैसले में कहा है कि पुलिस सेवा में भर्ती होने वाला सदस्य विश्वास के योग्य होना चाहिए और वह इंसाफ करने वाला व्यक्ति होना चाहिए, साथ ही वह बेदाग चरित्र वाला और ईमानदार होना चाहिए।
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इसमे कहा गया है कि जहां तक उम्मीदवार की उपयुक्तता का संबंध है तो पूरी जांच प्रक्रिया के जरिए उसके दोषमुक्त या बरी हो जाने से भी फर्क नहीं पड़ता है। फैसले में कहा गया है कि अगर उम्मीदवार दोषमुक्त और बरी भी हो जाता है तो भी उसे पूरी तरह से दोषमुक्त नहीं माना जा सकता है। बेंच के मुताबिक जो पुलिस की विश्वसनीयता को कम करता हो उसे पुलिस दल में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
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आपराधिक मामलों में बरी होने पर कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त की मासूमियत को निर्णायक नहीं माना जा सकता है, ऐसा आदेश उचित संदेह के इतर तब भी दिया जा सकता है जब अभियोजन पक्ष आरोपी पर अपराध सिद्ध न कर पाने की सूरत में हो।

आरोप मुक्त होने पर भी अयोग्य होगा उम्मीदवार

No job in police force even if you are exonerated in criminal case

बेंच ने कहा कि बरी किए जाने के बाद भी अदालत के आदेश के आधार पर यह मामला समक्ष अधिकारी के पास चला जाता है। सबूतों के अभाव में आरोपमुक्ति को भी अयोग्यता का आधार बनाया जा सकता है।

पुलिस विभाग के अधिकारी और स्क्रीनिंग कमेटी के पास यह पूरा अधिकार होता है कि वो किसी को अपनी टीम में शामिल करे या नहीं। अगर वो सोचती है कि तकनीकी आधार पर दोषमुक्त साबित होना सम्मानजनक नहीं है तो वो ऐसे सदस्य को पुलिस विभाग में शामिल न करने का फैसला भी ले सकती है।

इस बेंच ने एक अन्य फैसले में कहा है कि यह बात पूरी तरह से स्पष्ट है कि पुलिस बल में शामिल होने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति इंसाफ प्रेमी होना चाहिए, साथ ही वो बेदाग और ईमानदार भी होना चाहिए।

गौरतलब है कि यह फैसला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की उस अनुमति के बाद आया है जिसमें दो आपराधिक मामलों का सामना कर रहे व्यक्ति को राज्य पुलिस में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। उम्मीदवार परवेज खान पर हमला और आपराधिक धमकी से संबंधित एक मामले में आरोप दर्ज है जबकि उन्हें दूसरे मामले में बरी कर दिया गया है, जो डकैती से संबंधित था। सप्रीम कोर्ट का कहना है कि ऐसा व्सक्ति पुलिस में शामिल होने के लायक नहीं है।

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