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महाराष्ट्रः 'बाहरियों' को नौकरी न देने का फरमान

Sun, 08 Feb 2015 08:25 AM IST
Updated Sun, 08 Feb 2015 08:25 AM IST
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no job in maharastra for outer people

‘मेक इन इंडिया’ की तर्ज पर ‘मेक इन महाराष्ट्र’ योजना भूमिपुत्र बनाम बाहरी के मुद्दे पर आकर अटक सकती है। महाराष्ट्र की भाजपा सरकार में शामिल शिवसेना कोटे से उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने कंपनियों में 80 फीसदी भूमिपुत्रों को रोजगार का फार्मूला लागू कर दिया है।

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20 फीसदी कोटे में बाहरी राज्यों के लोगों के बारे में विचार किया जाएगा। सरकार के रुख से जहां दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को राज्य में काम मिलना मुश्किल हो जाएगा, वहीं मौजूदा समय में कार्यरत अन्य राज्यों के लोगों की छंटनी भी शुरू हो सकती है।
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उद्योग मंत्री देसाई ने बताया कि महाराष्ट्र औद्योगिक विकास कारपोरेशन (एमआईडीसी) के पास 70 हजार एकड़ जमीन है। एमआईडीसी देश की सबसे बड़ी लैंडलार्ड है, इसलिए देश की जीडीपी में महाराष्ट्र का 14 फीसदी योगदान है।
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फडणवीस कर रहे ‘मेक इन महाराष्ट्र’ पर काम

no job in maharastra for outer people

उन्होंने कहा कि राज्य में लगने वाली औद्योगिक इकाईयों में रोजगार का पहला हक राज्य के लोगों का है। राज्य की कंपनियों में 80 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय लोगों के लिए निश्चित की गई हैं। अब तक इस नियम पर अमल नहीं हो रहा था लेकिन हमने अल्लाना ऑयल कंपनी को नोटिस जारी कर इसकी शुरुआत कर दी है।

एक तरफ शिवसेना भूमिपुत्र बनाम बाहरी के मुद्दे पर राजनीति कर रही है तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री फडणवीस राज्य में अधिक से अधिक निवेश के लिए ‘मेक इन महाराष्ट्र’ योजना पर काम कर रहे है।

उनका फोकस राज्य के पिछड़े इलाके विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र पर है। उद्योग जगत के लिए शिवसेना का मराठी बनाम बाहरी राग मुख्यमंत्री को परेशान कर सकता है।

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