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लोकसभा में आसान नहीं प्रमोशन में आरक्षण बिल की राह

Sat, 15 Dec 2012 10:22 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 15 Dec 2012 10:22 PM IST
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no easy way to Promotion reservation bill in LokSabhae

तमाम उतार चढ़ाव के बाद सोमवार को प्रमोशन में आरक्षण संबंधी बिल पर राज्यसभा में चर्चा के बाद वोटिंग होगी। सिर्फ सपा और शिवसेना को छोड़कर अन्य सभी पार्टियां बिल के समर्थन में खड़ी हैं। सदन में बहुमत का आंकड़ा विधेयक के पक्ष में है।

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मगर सपा के उग्र तेवरों को देखते हुए सरकार के मैनेजर कोई भी जोखिम उठाना नहीं चाह रहे हैं। राज्यसभा में बाधा पार होने के बाद सरकार के सामने बिल को लोकसभा में पारित करवाने की अग्निपरीक्षा होगी। संसद के शीतकालीन सत्र में चंद दिन शेष रह जाने के चलते भी बिल के अगले बजट सत्र तक टलने की संभावना जताई जा रही है।
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राज्यसभा में सोमवार को बिल पर चर्चा को आगे बढ़ाया जाएगा। सपा ऐलान कर चुकी है कि वह बहस में हिस्सा लेगी। पार्टी सांसद रामगोपाल यादव ने कहा है कि हम राज्यसभा में बहस में हिस्सा लेकर इस मसले पर सभी दलों का पर्दाफाश करेंगे। यादव ने कहा कि बहस के दौरान हम बताएंगे कि इस बिल के लागू होने के बाद किस तरह समाज दो वर्गों में बंट जाएगा।
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लिहाजा सपा के विरोध के चलते बहस गर्मागरम हो सकती है। वहीं सदन में संविधान संशोधन बिल पर वोटिंग के दौरान सपा अगर हंगामा करती है तो सरकार के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। इसलिए सरकार के मैनेजर ऐसी स्थिति से बचने की रणनीति बनाने में जुटे हैं। सपा के शीर्ष नेताओं से रणनीतिकार लगातार संपर्क में है।

राज्यसभा में सरकार बिल को पारित कराने की हैसियत में लग रही है। सदन में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने बिल का खुलकर समर्थन किया है। सपा और शिवसेना को छोड़कर कोई भी दल बिल के सीधे विरोध में नहीं है। उधर, लोकसभा में बिल को पारित करवाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।


लोकसभा में सपा के 21 सांसद हैं, जो बिल का विरोध करने के लिए तैयार बैठे हैं। लोकसभा में बिल के रास्ते में एक और अड़चन यह है कि संसद का शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर को खत्म होने जा रहा है। इसलिए सरकार के पास इसे दोनों सदनों में पारित करवाने के लिए कुल चार दिन ही हैं, जबकि इस बिल के अलावा भी सरकार के सामने बहुत सारा विधायी कार्य लंबित पड़ा है, जिसे भी संसद की मंजूरी बहुत जरूरी है। ऐसे में इस सत्र में राज्यसभा की सीढ़ी पार हो जाने के बाद भी लोकसभा में बिल की राह आसान नहीं लग रही है।

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