न्यायपालिका और सरकार के बीच कोई टकराव नहीं : चीफ जस्टिस
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राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को असंवैधानिक करार देने के शीर्ष अदालत के फैसले के बाद न्यायपालिका और कार्यपालिका में किसी तरह के टकराव से सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू ने इनकार किया है।
प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू ने एक चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा है कि एनजीएसी के फैसले से न्यायपालिका और सरकार के रिश्ते में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने दोटूक कहा कि इस बात को लेकर दोनों के बीच किसी तरह का टकराव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा है कि हम अपना काम करते हैं। इसका अंतिम परिणाम क्या होगा, यह हमारे हाथ में नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं आश्वास्त हूं सरकार भलीभांति परिपक्व है और वह सही सोच के साथ अपना निर्णय लेगी।
40 फीसदी जजों के पद रिक्त
प्रधान न्यायाधीश ने कहा है कि यह फैसला न्यायपालिका के लिए अच्छा है क्योंकि करीब 40 फीसदी जजों के पद रिक्त हैं। अब इन रिक्तियां को भरने का काम शुरू किया जा सकेगा।
मालूम हो कि एनजेएसी का मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति का काम रुका पड़ा हुआ था। बता दें कि इस वक्त सुप्रीम कोर्ट में तीन और विभिन्न हाईकोर्ट में 392 जजों के पद रिक्त हैं।
प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू ने यह भी कहा है कि जजों की नियुक्ति को लेकर वह अन्य न्यायमूर्ति से विचार विमर्श करने की कोशिश करेंगे या वह तीन नवंबर का इंतजार करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने कोलेजियम सिस्टम में सुधार को लेकर सरकार समेत अन्य से सुझाव मांगे हैं, जिस पर तीन नवंबर को सुनवाई होनी है।