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पीएम की दो टूक, अमेरिकी दबाव में नहीं लेते फैसले
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 29 Sep 2012 12:54 PM IST
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि वे किसी दूसरे देश के इशारे अथवा दबाव में काम नहीं करते हैं। उन्होंने विपक्ष के उन दावों को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था प्रधानमंत्री अधिकतर फैसले अमेरिकी दबाव में करते हैं। पीएम ने कहा कि वे देश हित के लिए कुछ भी करेंगे। रिटेल में एफडीआई जैसे आर्थिक सुधार के फैसले मुल्क की सेहत के लिए जरूरी है और इसे जारी रखा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा था कि अमेरिकी दबाव में रिटेल में एफडीआई का फैसला लिया गया है। मोदी ने पीएम पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि आमतौर पर गंभीर मुद्दों पर भी खामोश रहने वाले प्रधानमंत्री अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव आते ही सिंघम क्यों बन जाते हैं। देश यह जानना चाहता है कि पिछले आठ साल में वे दो बार ही सिंघम क्यों बने। एक तो अमेरिका के साथ परमाणु करार के समय और दूसरा अब रिटेल में एफडीआई के मुद्दे पर।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट की राय का स्वागत किया। इस संबंध में सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि सरकार को प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन सिर्फ नीलामी के जरिए करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। सरकार इन संसाधनों का आवंटन अपनी आर्थिक नीति के तहत करती है। लेकिन अदालतें किसी भी तरह के आवंटन की प्रक्रिया में धांधली होने पर हस्तक्षेप करने के लिए स्वतंत्र हैं।
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उल्लेखनीय है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा था कि अमेरिकी दबाव में रिटेल में एफडीआई का फैसला लिया गया है। मोदी ने पीएम पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि आमतौर पर गंभीर मुद्दों पर भी खामोश रहने वाले प्रधानमंत्री अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव आते ही सिंघम क्यों बन जाते हैं। देश यह जानना चाहता है कि पिछले आठ साल में वे दो बार ही सिंघम क्यों बने। एक तो अमेरिका के साथ परमाणु करार के समय और दूसरा अब रिटेल में एफडीआई के मुद्दे पर।
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प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट की राय का स्वागत किया। इस संबंध में सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि सरकार को प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन सिर्फ नीलामी के जरिए करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। सरकार इन संसाधनों का आवंटन अपनी आर्थिक नीति के तहत करती है। लेकिन अदालतें किसी भी तरह के आवंटन की प्रक्रिया में धांधली होने पर हस्तक्षेप करने के लिए स्वतंत्र हैं।
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