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भूमि अधिग्रहण बिल पर नहीं बनी सहमति

Thu, 07 Mar 2013 11:06 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Thu, 07 Mar 2013 11:06 PM IST
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no consensus on land reform bill in all party meet

भूमि अधिग्रहण विधेयक को लेकर बृहस्पतिवार को हुई सर्वदलीय बैठक बिना किसी सहमति के खत्म हो गई।

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बिल पर कोई आमराय नहीं बनने के चलते केंद्र सरकार ने प्रस्तावित विधेयक के मसौदे को संबंधित नेताओं के पास भेजने का फैसला लिया है ताकि अगली बैठक में उनके सुझावों पर विचार विमर्श किया जा सके।

संसद भवन में आयोजित सर्वदलीय बैठक में विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने इस मसले पर अपनी राय रखी। ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने बैठक में कहा कि विधेयक पर संशोधनों की संख्या घटकर 28 रह गई है और सरकार को भरोसा है कि चालू बजट सत्र में यह विधेयक आसानी से पारित हो जाएगा।
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प्रस्तावित विधेयक के कुछ प्रावधानों पर कई सदस्यों के आपत्ति जताने पर संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ और रमेश ने कहा कि बिल की प्रतियां सभी पार्टियों को बृहस्पतिवार रात तक भेज दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि सभी पार्टियां विधेयक का अध्ययन कर 20 मार्च को होने वाली अगली बैठक में अपने सुझाव रख सकती हैं।
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बैठक के दौरान सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या के चलते जमीन पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में कई उपजों वाली कृषि योग्य भूमि का हाउसिंग और अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इसका समर्थन करते हुए जदयू प्रमुख शरद यादव ने कहा कि उपजाऊ कृषि भूमि का हाउसिंग और इंडस्ट्रीकरण के लिए अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिए।

बिल में 100 से अधिक संशोधन लाने वाली लेफ्ट पार्टियों ने कहा कि हाल ही में सरकार ने 180 से अधिक संशोधन की बात कही थी, जिसमें ज्यादातर की स्थायी समिति ने सिफारिश नहीं की थी।

बैठक के बाद सीपीएम के वासुदेब आचार्य ने कहा कि ऐसे में इस बिल को स्थायी समिति या फिर सेलेक्ट कमेटी को भेजना उचित है जोकि इन संशोधनों का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट चालू बजट सत्र में रखे।

वहीं माकपा के सीताराम येचुरी ने कहा कि बिल को फिर से तैयार किए जाने या फिर इसमें और अधिक संशोधन किए जाने की जरूरत है। तृणमूल कांग्रेस ने बिल को फिर से संसदीय समिति को भेजे जाने का विरोध किया है।


बिल में प्राइवेट प्रोजेक्टों के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए 80 फीसदी लोगों की सहमति को अनिवार्य किया गया है। जबकि संशोधित बिल में सार्वजनिक-निजी पार्टनरशिप प्रोजेक्टों के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए 70 फीसदी लोगों की सहमति को अनिवार्य बनाया गया है।

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