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'भगोड़े आरोपी को नहीं दी जा सकती अग्रिम जमानत'
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 07 Dec 2013 12:13 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक मामलों की जांच में सहयोग नहीं करने वाले और अदालत से भगोड़ा घोषित आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है।
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चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम और जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने कहा कि अग्रिम जमानत देने के अदालत के अधिकार का सिर्फ अपवाद स्वरूप उन मामलों में ही इस्तेमाल होना चाहिए जहां ऐसा लगता है कि व्यक्ति को गलत फंसाया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए बेंच ने कहा कि यदि किसी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के अनुसार फरार या घोषित अपराधी करार दिया जा चुका है तो वह अग्रिम जमानत की राहत पाने का हकदार नहीं है।
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बेंच ने कहा कि यह प्रावधान स्पष्ट करता है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 के तहत प्रदत्त अधिकार असाधारण स्वरूप का है और इसका इस्तेमाल अपवाद स्वरूप मामलों में ही किया जाना चाहिए जहां ऐसा लगता हो कि व्यक्ति को झूठा फंसाया गया है या यह लगता हो कि किसी अपराध का आरोपी व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा।
अदालत ने एक व्यक्ति को कथित रूप से जहर देकर मारने की घटना के बाद से ही फरार दो अभियुक्तों को अग्रिम जमानत देने का मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का निर्णय निरस्त करते हए यह बात कही।
बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट यह समझने में विफल रहा कि कानून में यह निश्चित व्यवस्था है कि जब किसी आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया जाए और वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा हो तो उसे अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
अदालत ने कहा कि इस तथ्य के मद्देनजर दोनों अभियुक्तों को संबंधित अदालत में दो सप्ताह के भीतर समर्पण करने का निर्देश दिया जाता है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया जाए।